गढ़वा भाजपा संगठन में अंदरूनी समीकरण सक्रिय, अध्यक्ष पद पर निर्णय अब नेतृत्व के हाथ

Location: Garhwa


गढ़वा : गढ़वा जिला भाजपा अध्यक्ष पद को लेकर इन दिनों संगठन के भीतर गहरी राजनीतिक हलचल देखने को मिल रही है। हाल ही में जिला भाजपा कार्यालय में संपन्न हुई रायशुमारी ने भले ही किसी एक नाम पर औपचारिक सहमति नहीं बनाई हो, लेकिन इस प्रक्रिया ने संगठन के अंदर चल रहे शक्ति संतुलन, गुटीय समीकरण और नेतृत्व के प्रभाव को पूरी तरह उजागर कर दिया है। यही वजह है कि रायशुमारी के बाद से गढ़वा भाजपा की राजनीति और अधिक रोचक व चर्चित हो गई है।
इस बार जिला अध्यक्ष पद के लिए कुल 15 नेताओं ने अपनी दावेदारी पेश की। इनमें संतोष दुबे, ओमप्रकाश केशरी, उदय कुशवाहा, उमेश कश्यप, इंद्रमणि जायसवाल, सूरज गुप्ता, मुकेश चौबे, लक्ष्मण राम, रामाशीष तिवारी, ठाकुर प्रसाद महतो, अनीता गुप्ता, अरविंद तुफानी और मधुलता कुमारी जैसे नाम शामिल हैं। इतनी बड़ी संख्या में दावेदारों का सामने आना यह संकेत देता है कि संगठन के भीतर न केवल महत्वाकांक्षा बढ़ी है, बल्कि जिला इकाई की राजनीति कई धड़ों में बंटी हुई भी नजर आ रही है।
भाजपा की संगठनात्मक परंपरा में रायशुमारी को जमीनी राय जानने का माध्यम माना जाता है, लेकिन व्यावहारिक रूप से यह केवल एक संकेतक प्रक्रिया बनकर रह जाती है। गढ़वा में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला। रायशुमारी के दौरान किसी एक नाम पर सर्वसम्मति नहीं बनी, लेकिन सूत्रों के अनुसार सबसे अधिक बार जिस नाम का उल्लेख हुआ, वह ओमप्रकाश केशरी का रहा। यही कारण है कि रायशुमारी के बाद वे अन्य दावेदारों की तुलना में आगे नजर आने लगे हैं।
वरिष्ठ नेताओं की भूमिका और मंडल अध्यक्षों का रुख
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि गढ़वा भाजपा की इस पूरी कवायद में वरिष्ठ नेताओं की भूमिका निर्णायक साबित हो सकती है। सूत्रों का दावा है कि वर्तमान विधायक सत्येंद्र नाथ तिवारी, पूर्व विधायक भानु प्रताप शाही और रामचंद्र चंद्रवंशी जैसे कद्दावर नेताओं का झुकाव ओमप्रकाश केशरी की ओर है। रायशुमारी के दौरान यह भी देखा गया कि जिले के कई मंडल अध्यक्षों ने इन्हीं वरिष्ठ नेताओं के संकेत पर ओमप्रकाश केशरी के नाम का समर्थन किया।
यह स्थिति यह बताती है कि जिला अध्यक्ष पद की लड़ाई केवल दावेदारों के बीच नहीं है, बल्कि इसके पीछे वरिष्ठ नेतृत्व के प्रभाव और संगठनात्मक संतुलन का भी बड़ा खेल चल रहा है। मंडल अध्यक्षों का रुख इस बात का संकेत देता है कि जमीनी संगठन में किसे कितना समर्थन हासिल है।
हालांकि, भाजपा की कार्यप्रणाली को देखते हुए यह मान लेना कि रायशुमारी में आगे रहने वाला ही जिला अध्यक्ष बनेगा, पूरी तरह सही नहीं होगा। पार्टी में पहले भी कई बार ऐसा देखा गया है कि रायशुमारी के परिणामों से अलग जाकर प्रदेश या केंद्रीय नेतृत्व ने संगठनात्मक जरूरतों, सामाजिक समीकरण, जातीय संतुलन और आगामी चुनावी रणनीति को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया है।
गढ़वा जिले में भी यही सवाल सबसे बड़ा बनकर उभर रहा है—क्या इस बार नेतृत्व रायशुमारी के संकेतों को तरजीह देगा या फिर किसी नए चेहरे अथवा संतुलित विकल्प पर दांव खेलेगा? यह प्रश्न इसलिए भी अहम है क्योंकि आने वाले समय में पंचायत, विधानसभा और लोकसभा जैसे बड़े राजनीतिक पड़ाव संगठन की मजबूती पर निर्भर करेंगे।
भाजपा सूत्रों के अनुसार 25 दिसंबर तक प्रदेश नेतृत्व द्वारा गढ़वा जिला भाजपा अध्यक्ष के नाम की औपचारिक घोषणा की जा सकती है। जैसे-जैसे यह तारीख नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे दावेदारों की बेचैनी और संगठन की सरगर्मी बढ़ती जा रही है। हर खेमे में अपने-अपने स्तर पर जोड़-तोड़, समर्थन जुटाने और नेतृत्व तक संदेश पहुंचाने की कोशिशें तेज हो गई है।
फिलहाल इतना तय है कि रायशुमारी ने गढ़वा भाजपा के अंदरूनी समीकरणों को पूरी तरह सक्रिय कर दिया है। ओमप्रकाश केशरी को भले ही इस समय बढ़त मिलती दिख रही हो, लेकिन अंतिम फैसला पूरी तरह प्रदेश नेतृत्व के हाथ में है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट हो जाएगा कि भाजपा नेतृत्व गढ़वा जिले के संगठन की कमान किसे सौंपता है और क्या यह निर्णय संगठन को एकजुट करने में सफल होगा या नई राजनीतिक बहसों को जन्म देगा।

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  • Vivekanand Upadhyay

    Location: Garhwa Vivekanand Updhyay is the Chief editor in AapKiKhabar news channel operating from Garhwa.

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