Location: Garhwa
- अवैध बालू खनन पर सख्ती, तीन अनुमंडलों में धारा 163 लागू
गढ़वा। मॉनसून अवधि में पर्यावरण संरक्षण और जनसुरक्षा को लेकर जिला प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है। गढ़वा, रंका और श्री बंशीधर नगर अनुमंडल क्षेत्रों में अवैध बालू खनन, भंडारण और परिवहन पर रोक लगाने के लिए बीएनएसएस की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। संवेदनशील नदी घाटों पर विशेष निगरानी और गश्ती अभियान चलाने का निर्देश दिया गया है। - जिले के 27 पर्यटन एवं तीर्थ स्थलों के विकास की योजना पर मंथन
गढ़वा। उपायुक्त पशुपति नाथ मिश्रा की अध्यक्षता में जिला पर्यटन संवर्धन परिषद (डीटीपीसी) की बैठक में जिले के 27 पर्यटन एवं धार्मिक स्थलों के विकास, सौंदर्यीकरण और आधारभूत सुविधाओं के विस्तार पर चर्चा की गई। बैठक में सतबहिनी झरना मंदिर और अन्नराज डैम को पर्यटन श्रेणी ‘बी’ से ‘ए’ में अपग्रेड करने का प्रस्ताव पारित किया गया। साथ ही विभिन्न मंदिरों एवं पर्यटन स्थलों पर शौचालय, पार्क, विवाह मंडप, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था और पार्किंग जैसी सुविधाएं विकसित करने पर सहमति बनी। - राशन वितरण में पारदर्शिता पर जोर, बीएसओ को बनाया जाएगा गोदाम प्रभारी
गढ़वा। समाहरणालय सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में उपायुक्त ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) एवं झारखंड राज्य खाद्य सुरक्षा योजना (जेएसएफएसएस) की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने लाभुकों तक समयबद्ध और पारदर्शी खाद्यान्न वितरण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। साथ ही सभी प्रखंडों में प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारियों (बीएसओ) को ही गोदाम प्रभारी बनाने का निर्देश देते हुए जनसेवकों एवं अन्य कर्मियों को गोदाम प्रभार से मुक्त करने की बात कही। बैठक में ई-केवाईसी, राइटफुल टार्गेटिंग अभियान और लंबित शिकायतों के त्वरित निष्पादन पर भी जोर दिया गया। - एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के 23 मामलों में सहायता राशि स्वीकृत
गढ़वा। उपायुक्त की अध्यक्षता में आयोजित जिला स्तरीय सतर्कता एवं मॉनिटरिंग समिति की बैठक में अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम से संबंधित 31 मामलों की समीक्षा की गई। समीक्षा के बाद 23 मामलों में अनुग्रह सहायता राशि के भुगतान की स्वीकृति प्रदान की गई। उपायुक्त ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि स्वीकृत मामलों में पीड़ितों को निर्धारित समयसीमा के भीतर सहायता राशि उपलब्ध कराई जाए तथा लंबित मामलों के त्वरित निष्पादन के लिए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।