Location: Garhwa
गढ़वा नगर परिषद चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे वार्ड संख्या 5, 7 और 8 की बदहाली निवर्तमान नगर परिषद के प्रतिनिधियों के लिए सियासी चुनौती बनती जा रही है। शहर के हार्ट ऑफ द टाउन कहे जाने वाले वार्ड संख्या 5 के अंतर्गत चौधराना बाजार, सात गढ़ देवी मोहल्ला जैसे घनी आबादी वाले इलाके आते हैं, जहां ऐतिहासिक खादी बाजार का मैदान और धार्मिक आस्था का केंद्र मां गढ़ देवी मंदिर स्थित होने के बावजूद नागरिक बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझ रहे हैं।
सड़क, नाली, पेयजल, स्ट्रीट लाइट और स्वच्छता जैसे मुद्दे अब सिर्फ स्थानीय परेशानी नहीं रह गए हैं, बल्कि चुनावी बहस के केंद्र में आ चुके हैं। वार्ड संख्या 8 नगवां में गंदगी और जर्जर नालियों को लेकर लोगों का गुस्सा साफ दिख रहा है, वहीं वार्ड संख्या 5 और 7 में हाट-बाजार में आने वाले सैकड़ों लोगों के लिए यूरिनल और सार्वजनिक शौचालय की व्यवस्था न होना नगर परिषद की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
पेयजल पाइपलाइन बिछाने के नाम पर तीनों वार्डों की गलियों को खोदकर छोड़ दिया गया, जिससे सड़कें खंडहर में तब्दील हो चुकी हैं। बलि शाह लेन जैसे इलाकों में पाइपलाइन बिछने के बावजूद अब तक पानी नहीं पहुंचने को लेकर लोगों में खुला आक्रोश है। रात के अंधेरे में खराब स्ट्रीट लाइटों के कारण गलियां असुरक्षित हो चुकी हैं, और लोग सवाल कर रहे हैं कि आखिर नगर परिषद ने इतने वर्षों में किया क्या।
दानरो और सरस्वती नदी को लेकर हालात और भी गंभीर हैं। नगर परिषद द्वारा नदी किनारे कचरा फेंककर डंपिंग यार्ड बनाए जाने से दोनों नदियां प्रदूषण की शिकार हो चुकी हैं। सरस्वती नदी नाली बनती जा रही है और दानरो नदी में फैलता कचरा पूरे शहर के लिए खतरे की घंटी बन गया है। इसे लेकर स्थानीय स्तर पर नाराजगी अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में बदलने लगी है।
23 फरवरी को होने वाले नगर परिषद चुनाव और 29 जनवरी से 4 फरवरी तक चलने वाली नामांकन प्रक्रिया के बीच इन वार्डों की समस्याएं निवर्तमान प्रतिनिधियों खेमे के लिए सबसे बड़ा इम्तिहान बन गई हैं। मोहल्लों, बाजारों और चौपालों में खुलकर चर्चा हो रही है कि इस बार वोट वादों पर नहीं, काम के हिसाब से पड़ेगा। मतदाताओं का साफ कहना है कि जिसने बदहाली छोड़ी है, उसे दुबारा बने रहने का हक नहीं, और यही नाराजगी चुनावी नतीजों को उलट-पलट करने की ताकत रखती है।











