Location: कांडी
कांडी (प्रतिनिधि) :
“जी चाहता है कि जहर खाकर आत्महत्या कर लूं” — यह शब्द हैं गढ़वा जिले के कांडी प्रखंड अंतर्गत लमारी कला पंचायत के हरिगावां गांव निवासी 35 वर्षीय दिव्यांग युवक रंजीत कुमार पासवान उर्फ गुड्डू पासवान के, जो कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहा है। गरीबी और लाचारी उसकी हर धड़कन में साफ झलकती है।
फूस की झोपड़ी में रहने वाला रंजीत दोनों पैरों से दिव्यांग है। बचपन में ही उसके पिता रामचंद्र पासवान का देहांत हो गया था। वह अपनी मां के साथ किसी तरह जिंदगी गुजार रहा है। रंजीत ने बताया कि करीब एक वर्ष पहले उसकी कमर में एक घाव उभर आया था, जो धीरे-धीरे ट्यूमर में बदल गया। आर्थिक तंगी के कारण इलाज कराना संभव नहीं हो पाया। हालत बिगड़ने पर वह किसी तरह उधार पैसे लेकर वाराणसी स्थित हेरिटेज अस्पताल पहुंचा, जहां जांच के बाद डॉक्टरों ने उसे कैंसर बताया।
कैंसर का नाम सुनते ही रंजीत का दिल बैठ गया। आंखें नम हो गईं। उसका कहना है कि दिव्यांग पेंशन से इलाज कराना असंभव है। ऐसे में अब उसके पास न तो पैसे हैं और न ही कोई सहारा। रंजीत ने मीडिया के माध्यम से समाजसेवियों और सरकार से अपील की है कि उसकी मदद की जाए, ताकि उसे भी जीने का अवसर मिल सके।
उसने भावुक होकर कहा — “मैं मरना नहीं चाहता, जीना चाहता हूं। लेकिन यदि सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो कैंसर से तड़प-तड़प कर मरने से अच्छा है कि मैं जहर खा लूं।”
रंजीत की यह अपील सिर्फ उसकी नहीं, बल्कि उन हजारों गरीबों की आवाज़ है जो बीमारी और गरीबी के दोहरे मार से जूझ रहे हैं। जरूरत है कि शासन-प्रशासन संवेदनशीलता दिखाते हुए ऐसे मामलों पर तत्परता से ध्यान दे।











