Location: Garhwa
गढ़वा के अन्नराज डैम में 16 वर्षीय छात्र की डूबकर मौत…
पर्यटन स्थल घोषित, लेकिन सुरक्षा के नाम पर सिर्फ वादे—कब जागेगा प्रशासन?
गढ़वा मुख्यालय से कुछ ही दूरी पर स्थित अन्नराज डैम रविवार को एक बार फिर दर्दनाक हादसे का केंद्र बन गया। 16 वर्षीय आयुष चौबे, जो शांतिनिवास स्कूल में कक्षा 12 का छात्र था, अपने तीन दोस्तों के साथ यहां घूमने आया था। नहाते समय वह पानी में कूद गया और दोबारा सतह पर नहीं आ सका। कुछ ही पलों में हंसी-खुशी का माहौल चीख-पुकार में बदल गया।
सूचना मिलते ही थाना प्रभारी बृज कुमार पुलिस बल के साथ घटनास्थल पहुंचे। किनारे पर आयुष की नारंगी टी-शर्ट और ग्रे लोअर मिलीं। पिता का रो-रोकर बुरा हाल था—“उसे तैरना नहीं आता था… शायद दोस्तों के जोश में कूद गया… वह मेरा इकलौता बेटा था, कल ही बहनों से राखी बंधवाई थी…”
स्थानीय गोताखोरों ने कई घंटों तक तलाश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। शाम तक SDRF को बुलाने की प्रक्रिया शुरू हुई। लगातार 24 घंटे की कोशिशों के बाद सोमवार सुबह 11:30 बजे आयुष का शव डैम से बरामद हुआ। इस घटना के बाद पूरे इलाके में शोक और आक्रोश का माहौल है।
बरसों से दोहराई जा रही त्रासदी
अन्नराज डैम में यह कोई पहली घटना नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में यहां आधा दर्जन से ज्यादा लोग डूबकर अपनी जान गंवा चुके हैं। इसके बावजूद आज तक यहां सुरक्षा के स्थायी इंतजाम नहीं किए गए।
डैम में सालों भर पानी भरा रहता है और बरसात में यह लबालब हो जाता है, जिससे इसकी गहराई कई गुना बढ़ जाती है। इसे पर्यटन स्थल घोषित करने के बावजूद यहां चेतावनी पट्ट, बैरिकेडिंग और प्रशिक्षित सुरक्षा गार्ड की कोई व्यवस्था नहीं है। जिला मुख्यालय के नजदीक होने से यहां रोजाना सैलानी आते हैं, लेकिन उनकी सुरक्षा पूरी तरह भगवान भरोसे है।
हर बार हादसे के बाद ही क्यों जागता है प्रशासन?
स्थानीय लोगों का कहना है कि हर बार हादसे के बाद प्रशासन रेस्क्यू टीम बुलाने, चेतावनी पट्ट लगाने और सुरक्षा गार्ड तैनात करने की बात करता है, लेकिन समय बीतते ही सब भूल जाता है। नतीजा यह है कि हर साल किसी न किसी परिवार का चिराग बुझ जाता है और डैम की गहराइयां मासूम जिंदगियों को निगलती रहती हैं।
लोग सवाल कर रहे हैं—
“क्या प्रशासन को किसी और जान के जाने का इंतजार है? आखिर पर्यटन स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था कब होगी?”











