Location: Garhwa
साल 2025 गढ़वा नगर परिषद क्षेत्र के लिए कई मायनों में निराशाजनक रहा, लेकिन सबसे बड़ी और गंभीर समस्या डंपिंग यार्ड का अभाव और बदहाल कचरा प्रबंधन रही। इसी लापरवाही का सबसे बड़ा शिकार बनी दानरो नदी, जो गढ़वा शहर की जीवनरेखा मानी जाती है। नगर परिषद प्रशासन की अव्यवस्थित कार्यशैली के कारण इस नदी को कचरा निस्तारण का माध्यम बना दिया गया, जिससे वह लगातार प्रदूषण का शिकार होती चली गई।
वर्षों से गढ़वा नगर परिषद क्षेत्र में स्थायी डंपिंग यार्ड की जरूरत महसूस की जा रही है, लेकिन 2025 में भी यह व्यवस्था जमीन पर नहीं उतर सकी। डंपिंग यार्ड के अभाव में शहर से निकलने वाला कचरा वैज्ञानिक तरीके से निस्तारित नहीं हो पाया। परिणामस्वरूप कचरा खुले में और नदी के किनारे फेंका जाने लगा। दानरो नदी के आसपास जमा कचरे ने पूरे इलाके में गंदगी, बदबू और संक्रमण का खतरा बढ़ा दिया।
दानरो नदी गढ़वा शहर के लिए केवल एक नदी नहीं, बल्कि पेयजल, सिंचाई और पर्यावरण संतुलन की दृष्टि से अहम जीवनरेखा है। बावजूद इसके, 2025 में इसे लगातार प्रदूषित किया गया। नदी में और उसके किनारों पर डाले जा रहे कचरे से जल की गुणवत्ता प्रभावित हुई और आसपास रहने वाले लोगों का जीवन मुश्किल हो गया। लोगों का आरोप है कि नगर परिषद ने स्वच्छता के नाम पर शहर की लाइफलाइन को ही नुकसान पहुंचाया।
कचरा प्रबंधन की इस विफलता का असर पूरे शहर में दिखा। कई वार्डों में नियमित कचरा उठाव नहीं हो सका और गली-मोहल्लों में कचरे के ढेर लगे रहे। आवारा पशु कचरे में मुंह मारते दिखे और बीमारियों का खतरा बढ़ता चला गया। स्वच्छता अभियान और सफाई व्यवस्था के दावे जमीनी हकीकत से दूर नजर आए।
पेयजल आपूर्ति के क्षेत्र में भी नगर परिषद प्रशासन लोगों की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सका। वर्षों से लंबित शहरी कोयल नदी से पेयजल आपूर्ति योजना 2025 में भी सभी वार्डों तक नहीं पहुंच सकी। साफ पानी की कमी के बीच दानरो नदी का प्रदूषित होना लोगों के लिए और बड़ी चिंता का विषय बन गया।
इसी दौरान नगर परिषद 2025 में अपनी बेशकीमती जमीन पर दुकान निर्माण को लेकर भी चर्चा में रही। बिना किसी समग्र शहरी योजना के बेतरतीब तरीके से दुकानों का निर्माण कराया गया, जिससे शहर की सूरत और ज्यादा बिगड़ गई। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस पूरे काम में नियोजन और जनहित से ज्यादा अधिकारियों की जेब भरने की प्राथमिकता दिखाई दी, जबकि डंपिंग यार्ड, कचरा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण जैसे जरूरी मुद्दे हाशिये पर चले गए।
सड़कों, गलियों और नालियों की बदहाली भी पूरे साल बनी रही। कहीं-कहीं मरम्मत जरूर हुई, लेकिन स्थायी सुधार नहीं हो सका। प्रशासनिक उदासीनता और गलत प्राथमिकताओं ने आम लोगों की नाराजगी को और गहरा कर दिया।
कुल मिलाकर 2025 गढ़वा नगर परिषद क्षेत्र के लिए ऐसा साल रहा, जिसे दानरो नदी के प्रदूषण और कचरा प्रबंधन की विफलता तथा बेतरतीब दुकान निर्माण कर जेब भरने के लिए लंबे समय तक याद रखा जाएगा। जिस नदी ने शहर को जीवन दिया, उसी को गंदगी का अड्डा बना दिया गया—और यही 2025 की सबसे बड़ी प्रशासनिक नाकामी बनकर सामने आई।











