Location: Garhwa
गढ़वा : अखण्ड भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा का आधार उसकी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान रही है, और इसमें संयुक्त परिवार की अहम भूमिका है। उक्त बातें संस्कार भारती झारखंड प्रांत के प्रांत मंत्री और पंडित हर्ष द्विवेदी कला मंच, नवादा के निदेशक नीरज श्रीधर स्वर्गीय ने कही।
उन्होंने कहा कि संयुक्त परिवार, जिसमें कई पीढ़ियाँ साथ रहती हैं, बच्चों को सुसंस्कारित बनाने में महत्वपूर्ण है। घर के बड़े सदस्य बच्चों को समय, मार्गदर्शन और संस्कृति देते हैं। उन्होंने बताया कि भारतीय संस्कृति के सोलह संस्कार संयुक्त परिवार में ही संभव हैं।
नीरज श्रीधर ने कहा कि वर्तमान समय में नई पीढ़ी में जो विकृतियाँ दिख रही हैं, उसका प्रमुख कारण संयुक्त परिवार व्यवस्था का खत्म होना है। उन्होंने कहा कि एकाकी परिवारों में माता-पिता की व्यस्तता के कारण बच्चों को निगरानी और सही वातावरण नहीं मिल पाता, जिससे उनमें नकारात्मक प्रवृत्तियाँ पनपती हैं।
उन्होंने कहा, यदि हम नई पीढ़ी में सकारात्मकता और राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका सुनिश्चित करना चाहते हैं, तो हमें फिर से संयुक्त परिवार व्यवस्था को बनाए रखने की दिशा में आगे बढ़ना होगा।











