
Location: Garhwa
श्री बंशीधर नगर में 19 और 20 मार्च को आयोजित दो दिवसीय राजकीय महोत्सव इस बार प्रशासनिक असफलता और राजनीतिक विवादों के कारण अपनी गरिमा खो बैठा। महोत्सव को भव्य बनाने के दावों के बावजूद प्रशासन व्यवस्था को सुचारू रूप से संचालित करने में पूरी तरह विफल रहा। मुख्यमंत्री के उद्घाटन समारोह तक ही प्रशासन की सक्रियता सीमित रही, उसके बाद दो दिनों तक पूरा आयोजन अव्यवस्था का शिकार हो गया। कुर्सियां टूटने से लेकर दर्शकों के बीच हंगामे तथा फुहड़पना की स्थिति बनी रही, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर इसे संभालने की कोई गंभीर कोशिश नहीं की गई।
इस आयोजन की विफलता का संकेत पहले ही मिलने लगा था, जब इसे लेकर पूर्व विधायक भानु प्रताप शाही ने सोशल मीडिया पर प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने यह सवाल उठाया था कि प्रशासन इस महोत्सव को झारखंड मुक्ति मोर्चा का कार्यक्रम बनाने में जुटा है, जो पूरी तरह अनुचित है। महोत्सव के दौरान इन आरोपों की पुष्टि तब होती दिखी जब विपक्षी दलों के कार्यकर्ता तो दूर, स्थानीय विधायक तक ने इससे दूरी बनाए रखी। पूरे आयोजन में सत्ता पक्ष का दबदबा साफ नजर आया, जिससे यह सवाल उठने लगा कि क्या यह एक सरकारी उत्सव था या किसी राजनीतिक दल का मंच?
धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से आम जनता को जोड़ने के उद्देश्य से आयोजित किए जाने वाले इस महोत्सव में इस बार लोगों का जुड़ाव अपेक्षाकृत कम दिखा। आयोजन में प्रशासनिक लापरवाही इतनी अधिक रही कि आम लोग इस महोत्सव से अधिक आकर्षित नहीं हो सके। स्थानीय स्तर पर धार्मिक आयोजनों तक में विभाजन की स्थिति दिखी, जिससे इसकी लोकप्रियता प्रभावित हुई।
इस बार का श्री बंशीधर महोत्सव प्रशासनिक अव्यवस्था और राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण विवादों में घिरा रहा। इसकी चर्चा भव्यता के बजाय बदइंतजामी और खींचतान के कारण ज्यादा रही। आयोजन अपने मूल उद्देश्य से भटक गया और जनता के बीच अपनी मजबूत छवि बनाने में विफल रहा।