रांची: बिहार में राष्ट्रीय जनता दल और महागठबंधन की बुरी हार को लेकर कल मैंने एक पोस्ट में तेजस्वी यादव के अहंकार, कार्यकर्ताओं से दूरी, टिकट बंटवारे में पैसे का खेल, जीत को लेकर अति आत्मविश्वास की चर्चा की थी। इन सब के पीछे तेजस्वी के सलाहकार हरियाणा के उनके मित्र राज्यसभा सांसद संजय यादव के संबंध में भी बताया था। तेजस्वी संजय यादव से पूरी तरह घिरे हुए हैं और इन्हीं के इशारे व सलाह पर सब फैसले लेते हैं।
संजय यादव के कारण ही लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप को परिवार और पार्टी से बाहर किया गया किया गया था। अब परिणाम के दूसरे दिन लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने राजनीति से संन्यास लेने के साथ-साथ परिवार से भी रिश्ता तोड़ने की घोषणा कर दी। यह बड़ी घोषणा है। लालू यादव को किडनी देकर रोहिणी चर्चा में आई थीं।
रोहिणी ने परिवार से नाता तोड़ने के बाद जो आरोप लगाया है वह बेहद गंभीर है। उन्होंने कहा है कि संजय यादव और रमीज के कारण परिवार में टूट और विद्रोह है। इनके खिलाफ बोलने पर चप्पल से मारा जाता है। घर से बाहर निकाल दिया जाता है। गलत आरोप लगाए जाते हैं। ऐसा क्यों होता है इसका जवाब तेजस्वी दे सकते हैं। उन्होंने भावुक होते हुए आज परिवार को अलविदा कह दिया। इस पूरे प्रकरण पर लालू यादव भी चुप हैं। यानी अब तेजस्वी लालू के कंट्रोल में नहीं हैं।
आखिर संजय यादव में ऐसा क्या खास है कि उनकी वजह से राजद के साथ-साथ परिवार में विद्रोह है। तेजस्वी उनके खिलाफ क्यों नहीं सुनना चाहते हैं। वजह क्या है।
जानकारी सूत्रों का कहना है कि संजय यादव तेजस्वी के लिए सब कुछ मैनेज करते हैं। टिकट बंटवारे में पैसे का लेनदेन का जो आरोप लगा और करोड़ों का जो खेल हुआ उसके पीछे संजय यादव का नाम सामने आया। दो नाम और चर्चा में आए। सुनील सिंह और यूपी के पूर्व क्रिकेटर रमीज का। यानी तेजस्वी इन तीनों से घिरे हुए हैं। इन्हीं की चलती है और तेजस्वी इन्हीं के इशारे पर सारे फैसले लेते हैं। यह लोग फंड मैनेजर के साथ-साथ उनके लिए सारे प्रबंध करते हैं। देश-विदेश के दौर भी मैनेज करते हैं। इन्हीं की वजह से तेजस्वी कार्यकर्ताओं और परिवार से दूर होते चले गए और अहंकार आता चला गया। लालू परिवार के लिए संजय यादव चाणक्य बन गए। जिसका परिणाम अब सामने आ रहा है। पूरे प्रकरण पर लालू यादव अपनी चुप्पी तोड़ते हैं या परिवार और पार्टी में विद्रोह और भड़कता है यह देखना होगा।











