
Location: Ranka
रंका (गढ़वा) – सरकार द्वारा क्रशर प्लांट और माइनिंग को लेकर जारी दिशा-निर्देशों के विपरीत, रंका थाना क्षेत्र के तमगे कला और बाहाहारा पंचायत में धड़ल्ले से दर्जनों क्रशर प्लांट और माइनिंग का संचालन किया जा रहा है। बीते दो वर्षों से पत्थर माफिया और अधिकारियों की मिलीभगत से यहां रहने वाले अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़े वर्ग के हजारों लोगों का जीवन संकट में है।
बिना किसी पूर्व सूचना और सुरक्षा व्यवस्था के किए जा रहे विस्फोटों से उड़कर खपरैल और कच्चे घरों की छतों पर पत्थर के टुकड़े गिरते हैं, जो मिसाइल के गोलों की तरह तबाही मचा रहे हैं। लेकिन अफसोस की बात यह है कि इनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
पुश्तैनी जमीन पर संकट
पिंडरा गांव के आदिवासी परिवारों—नंद कुमार सिंह, इनरदेव सिंह, शंकर सिंह, राजेश सिंह, तनोज सिंह, मनोज सिंह, पनबासी देवी, मीरा देवी, सबिता देवी, सुष्मिता देवी, अमृत सिंह, ओमप्रकाश सिंह सहित दर्जनों ग्रामीणों ने बताया कि वे दो सौ वर्षों से अपनी पुश्तैनी जमीन पर रह रहे हैं। लेकिन अगस्त 2024 में उनकी जमीन को बिना किसी जानकारी के मेदिनीनगर पुलिस लाइन निवासी अरुण कुमार सिन्हा के पुत्र अमित कुमार सिन्हा के नाम पर माइनिंग के लिए आवंटित कर दिया गया।
ग्रामीणों के अनुसार, खाता नंबर 33, प्लॉट नंबर 136; खाता नंबर 43, प्लॉट नंबर 135; और खाता नंबर 12, प्लॉट नंबर 181 की पांच एकड़ जमीन पर 50 से अधिक घर बने हुए हैं, जहां वे पीढ़ियों से रह रहे हैं। अब अचानक से इस जमीन पर पिलर गाड़े जा रहे हैं और घर खाली करने के लिए धमकाया जा रहा है।
सरकार और प्रशासन मौन
बाहाहारा पंचायत में चल रहे पत्थर खनन से सैकड़ों आदिवासी परिवार विस्थापन के कगार पर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि आदिवासियों की सुरक्षा का दावा करने वाली सरकार भी इस अन्याय पर चुप है। वे सवाल कर रहे हैं कि आखिर वे अपने बच्चों और परिवार को लेकर कहां जाएं?
स्थानीय प्रशासन और सरकार की इस चुप्पी से आदिवासी समुदाय में भारी आक्रोश है, और वे न्याय की उम्मीद में दर-दर भटक रहे हैं।