Location: Meral
मेराल। न्यायालय के आदेश के अनुपालन में विवादित भूमि पर बने मकानों को प्रशासन द्वारा बुलडोजर से हटाए जाने के बाद प्रभावित परिवारों ने गुरुवार को मेराल अंचल कार्यालय पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई। प्रभावित परिवारों ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने, दोषी अधिकारियों एवं संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की जांच करने तथा उचित राहत और मुआवजा दिलाने की मांग की है।
प्रभावित लोगों का कहना है कि उन्होंने संबंधित भूमि चिंतामणि पाण्डेय से विधिवत खरीदी थी। खरीदारी के समय उनके पास जमीन की रजिस्ट्री समेत सभी आवश्यक दस्तावेज मौजूद थे। उनका दावा है कि संबंधित भूमि का उनके नाम दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) भी हो चुका था। प्रभावितों ने सवाल उठाया कि जब प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद कर्मचारी के जांच प्रतिवेदन के आधार पर भूमि उनके नाम दर्ज की गई, तो अब उसी भूमि पर बने मकानों को अवैध कैसे घोषित किया गया।
प्रभावित परिवारों के अनुसार, जिन भूखंडों पर कार्रवाई की गई, उनमें से एक लाभुक विंदेश्वर वियार के नाम प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ भी स्वीकृत हुआ था। इसके अलावा जल जीवन मिशन के तहत उसी भूमि पर पानी की टंकी भी स्थापित की गई थी। प्रभावितों का कहना है कि जब संबंधित भूमि पर सरकारी योजनाओं का लाभ दिया गया, तो अब उसी जमीन को अवैध बताकर मकानों को ध्वस्त किया जाना उनके लिए गंभीर समस्या बन गया है।
प्रभावित परिवारों में श्रीकांत वियार, मुखलाल वियार एवं विनय वियार शामिल हैं। उनका कहना है कि बुलडोजर कार्रवाई में कच्चे मकान भी ध्वस्त कर दिए गए, जिससे उनके सामने रहने का संकट उत्पन्न हो गया है।
प्रभावित परिवारों ने बताया कि न्यायालय के आदेश के अनुसार उक्त भूमि गायत्री देवी को सौंपने का निर्देश दिया गया है। हालांकि उनका दावा है कि उन्हें मकान खाली करने के संबंध में व्यक्तिगत नोटिस नहीं दिया गया। उनके अनुसार, इस संबंध में भूमि विक्रेता चिंतामणि पाण्डेय को ही जानकारी थी, जबकि लंबे समय से वहां रह रहे परिवारों को सीधे बेदखली की सूचना नहीं मिली। मकान ध्वस्त होने के बाद प्रभावित परिवारों का कहना है कि उनके पास रहने के लिए कोई सुरक्षित ठिकाना नहीं बचा है।
इधर, मेराल अंचलाधिकारी यशवंत नायक ने कहा कि न्यायालय के निर्देश के आधार पर ही कार्रवाई करते हुए संबंधित भूमि को खाली कराया गया और न्यायालय के आदेश का अनुपालन सुनिश्चित किया गया। उन्होंने बताया कि प्रभावित परिवारों के लिए फिलहाल राशन की व्यवस्था कराई गई है तथा उनकी देखभाल की जिम्मेदारी संबंधित पंचायत के मुखिया को दी गई है।











