बजट में शिक्षा को प्राथमिकता न देना गंभीर चिंता का विषय : प्रिस

Location: कांडी

गढ़वा : अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के प्रदेश कार्यसमिति सदस्य प्रिंस कुमार सिंह ने झारखंड सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे पूरी तरह से उदासीन और निराशाजनक करार दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने बजट को गरीबों के कल्याण और “अबुआ दिशोम बजट” के रूप में पेश जरूर किया है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि छात्र, युवा, किसान और आम नागरिकों की मूल अपेक्षाएं इसमें स्पष्ट रूप से परिलक्षित नहीं होतीं।
प्रिंस ने विशेष रूप से छात्र समुदाय को केंद्र में रखते हुए कहा कि शिक्षा क्षेत्र में नवाचार, उच्च शिक्षा के विस्तार, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, डिजिटल संसाधनों और रोजगार उन्मुख योजनाओं को लेकर कोई ठोस और स्पष्ट दिशा इस बजट में दिखाई नहीं देती। उन्होंने कहा कि जब राज्य के लाखों विद्यार्थी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, छात्रवृत्ति और रोजगार के अवसरों के लिए संघर्ष कर रहे हैं, तब बजट में शिक्षा को प्राथमिकता न देना गंभीर चिंता का विषय है।
उन्होंने ओबीसी विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति के मुद्दे को उठाते हुए कहा कि राज्य में पहले से ही छात्रवृत्ति को लेकर असंतोष और संघर्ष की स्थिति बनी हुई है, लेकिन बजट भाषण में इस संवेदनशील विषय पर ठोस समाधान या स्पष्ट घोषणा का अभाव छात्रों की उपेक्षा को दर्शाता है। उनके अनुसार, बाल बजट और सुझाव लेने की बात करना सराहनीय हो सकती है, लेकिन जब तक विद्यार्थियों की वास्तविक शैक्षणिक और आर्थिक समस्याओं पर ठोस प्रावधान न हो, तब तक ऐसे दावे व्यवहारिक रूप से प्रभावी नहीं माने जा सकते।
प्रिंस सिंह ने कहा कि युवा वर्ग को इस बजट से रोजगार, कौशल विकास और स्टार्टअप प्रोत्साहन को लेकर बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन सरकार की ओर से कोई ठोस, परिणाममुखी और दीर्घकालिक योजना सामने नहीं आई। उन्होंने सवाल उठाया कि जब राज्य में बेरोजगारी एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है, तब बजट में युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए ठोस रोडमैप का अभाव क्यों है।
किसान और व्यावसायिक वर्ग को लेकर भी उन्होंने असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि बजट में इन वर्गों के लिए अलग से प्रभावी और लक्षित प्रावधान स्पष्ट रूप से नजर नहीं आते। उन्होंने कहा कि केवल वित्तीय चुनौतियों, केंद्रीय सहायता की कमी और आर्थिक दबाव का उल्लेख करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर राहत देने वाली योजनाओं का स्पष्ट खाका भी उतना ही जरूरी है।
श्री सिंह ने यह भी कहा कि सरकार ने राजकोष में उपलब्ध संसाधनों और वित्तीय स्थिरता का उल्लेख किया है, लेकिन यदि संसाधन उपलब्ध हैं तो शिक्षा, छात्र कल्याण, रोजगार और कृषि जैसे मूलभूत क्षेत्रों में ठोस निवेश क्यों नहीं दिख रहा। उनके अनुसार, बजट का स्वरूप घोषणात्मक अधिक और समाधानात्मक कम प्रतीत होता है।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह बजट छात्र, युवा, किसान और आम अवाम की अपेक्षाओं पर खरा उतरता नहीं दिख रहा है। उनके अनुसार, शिक्षा को पर्याप्त महत्व न देना, छात्रवृत्ति जैसे लंबित मुद्दों पर ठोस पहल का अभाव और रोजगार सृजन के लिए स्पष्ट रणनीति न होना इस बजट को व्यवहारिक रूप से उदासीन बनाता है, जिसके कारण व्यापक जनसमुदाय में निराशा का माहौल देखा जा रहा है।

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  • Rajeev Ranjan Singh

    Location: Kandi Rajeev Ranjan Singh is reporter at Aapki Khabar from Kandi, Garhwa

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