रांची। विधानसभा चुनाव की घोषणा से पहले बिहार की राजनीति तेजी से करवट बदल रही है। नेता भी पाला बदल रहे हैं। दुर्गा पूजा की महाष्टमी पर बड़ी खबर आई। भोजपुरी फिल्मों के पावर स्टार पवन सिंह की भाजपा में वापसी हो गई। दिल्ली में आज भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव व बिहार प्रभारी विनोद तावड़े ने पवन सिंह की भाजपा में वापसी की घोषणा की।
इसके साथ ही पवन सिंह को लेकर लगाए जा रहे कयासों पर विराम लग गया है। पवन सिंह के भाजपा में वापसी की खबरें कई दिनों से चल रही थीं। उन्होंने कुछ दिन पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और पूर्व केंद्रीय मंत्री आरके सिंह से मुलाकात की थी। राजनाथ सिंह ने उन्हें भाजपा में वापसी की सलाह दी थी। राजनाथ सिंह के कहने पर विनोद तावड़े ने पवन सिंह की वापसी का रास्ता तय किया। राजनाथ सिंह से मुलाकात के बाद ही यह तय हो गया था कि पवन सिंह भाजपा में वापस आएंगे। विधानसभा चुनाव में भाजपा और एनडीए के लिए प्रचार करेंगे। भाजपा उन्हें किसी सीट से चुनाव मैदान में उतार सकती है। हालांकि चुनाव लड़ने पर अभी फैसला नहीं हुआ है।
इधर, एक अन्य महत्वपूर्ण राजनीतिक घटना में पवन सिंह ने राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा से दिल्ली में उनके आवास पर जाकर मुलाकात की और उनका पांव छूकर आशीर्वाद लिया। उपेंद्र कुशवाहा से पवन सिंह की सुलह हो गई है। दोनों नेता अब एनडीए के लिए साथ-साथ काम करेंगे।
काराकाट लोकसभा चुनाव के दौरान उपेंद्र कुशवाहा और पवन सिंह के बीच जो दूरियां बढ़ी थी वह अब मिट गई है। पवन सिंह की भाजपा में वापसी और उपेंद्र कुशवाहा से सुलाह_सफाई के बाद बिहार की राजनीति खासकर शाहाबाद इलाके में इसका बड़ा प्रभाव देखने को मिलेगा। उपेंद्र कुशवाहा और पवन सिंह की वजह से क्षत्रिय समाज और कुशवाहा जाति के बीच जो दूरियां बढ़ गई थी वह भी अब खत्म होने की संभावना है। लोकसभा चुनाव पवन सिंह की फैक्ट्री की वजह से एनडीए को शाहाबाद क्षेत्र में भारी नुकसान उठाना पड़ा था।
बिहार विधानसभा चुनाव में पवन सिंह की भाजपा में वापसी का असर दिखेगा। पवन सिंह भोजपुरी फिल्मों के बड़े स्टार हैं, इसलिए उनके चाहने वालों की संख्या लाखों में है। युवाओं में उनका क्रेज है। पवन सिंह ने देर से ही सही लेकिन भाजपा में वापसी कर सही फैसला लिया है। अब आगे देखना होगा कि इसका क्या असर होता है।











