Location: पलामू
मेदिनीनगर (पलामू)। ज्ञान, साहित्य और सामाजिक चेतना के संगम के रूप में आयोजित पलामू पुस्तक मेला का समापन समारोह रविवार को गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी, विद्यार्थी, शिक्षक एवं सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
समारोह के मुख्य अतिथि नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर डॉ. दिनेश कुमार सिंह ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) तकनीक कितनी भी उन्नत क्यों न हो जाए, लेकिन पुस्तकों का स्थान कभी नहीं ले सकती। उन्होंने कहा कि विदेशी पुस्तकें सामान्यतः रेफरेंस आधारित होती हैं, जो महंगी होने के साथ-साथ कुछ वर्षों बाद अपनी प्रासंगिकता खो देती हैं, जबकि लेखक द्वारा अनुभव, संवेदना और मनोयोग से लिखी गई पुस्तकें दशकों तक समाज का मार्गदर्शन करती हैं।
उन्होंने स्वदेशी पुस्तकों और भारतीय चिंतन की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि यही हमारी संस्कृति, समाज और मानवीय मूल्यों को जीवित रखते हैं।
कार्यक्रम के स्वागत वक्तव्य में समय इंडिया के प्रबंध न्यासी एवं साहित्यकार चंद्र भूषण ने कहा कि पुस्तकें केवल कागज के पन्ने नहीं, बल्कि समाज की चेतना और सभ्यता की धड़कन होती हैं। उन्होंने युवाओं से मोबाइल की दुनिया से बाहर निकलकर पुस्तकों से जुड़ने का आह्वान किया।
इस अवसर पर पलामू पुस्तक मेला के स्थानीय संयोजक एवं सामाजिक कार्यकर्ता संजय वर्मन ने धन्यवाद ज्ञापन किया। उन्होंने मेले को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी साहित्यकारों, शिक्षकों, पाठकों एवं प्रशासनिक अधिकारियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि झारखंड-बिहार पुस्तक मेला परिक्रमा के तहत अगला आयोजन 28 से 31 मई तक गोड्डा के टाउन हॉल में होगा, जिसके बाद बिहार के भागलपुर, मुंगेर, दरभंगा, समस्तीपुर और मुजफ्फरपुर में दूसरे चरण का आयोजन किया जाएगा, जो जुलाई के प्रथम सप्ताह तक चलेगा।











