Location: रांची
रांची : झारखंड विकास के मामले में आगे नहीं बढ़ पा रहा है। एक मजबूत सरकार होने के बावजूद विकास की रफ्तार काफी धीमी है। दावे तो बहुत किए जा रहे हैं। लेकिन जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग है। खासकर पिछले एक साल में विकास के कोई खास काम नहीं हुए। धरातल पर कुछ दिखता नहीं है। योजनाएं अधूरी हैं। पुराना काम रुका हुआ है। नया कुछ शुरू नहीं हो रहा है। क्योंकि विकास कार्यों के लिए पैसा नहीं है। झारखंड गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है। ठेकेदार बोरिया-बिस्तर समेट रहे हैं।
इधर मंत्री बेबस हैं और विधायक लाचार। कहीं कोई सुनने वाला नहीं है। विधायक रोना रो रहे हैं, चाहे वह सत्ताधारी दल के हों या विपक्ष के। सभी के क्षेत्र में कोई काम नहीं हो रहा है। सबकी शिकायत सरकार से है।
इधर, कांग्रेस में असंतोष लगातार बढ़ रहा है। पार्टी के पांच विधायक कई दिनों से दिल्ली में थे और उन्होंने कांग्रेस हाईकमान से कांग्रेस के मंत्रियों की शिकायत करते हुए उन्हें हटाने की मांग की है। निशाने पर कांग्रेस कोटे से शामिल चार मंत्री हैं। विधायकों का कहना है कि मंत्री उनकी बात नहीं सुनते हैं। कोई काम नहीं हो रहा है। ऐसे में मंत्रियों का रहना या न रहना बराबर है।
कांग्रेस के विधायक पिछली सरकार में भी अपने मंत्रियों के खिलाफ नाराज थे। इस बार भी नाराज हैं। कहा जा रहा है कि कांग्रेस के 16 में से 12 विधायक मंत्रियों के कामकाज से नाराज हैं और उन्हें हटाने के लिए कांग्रेस हाईकमान पर दबाव बना रहे हैं।
पांच विधायकों को आगे किया गया है। बाकी सभी लोग पीछे से इनका समर्थन कर रहे हैं। इस बार एक रणनीति के तहत विधायकों ने आदिवासी और दलित विधायकों को आगे किया है। कांग्रेस के विधायक, विधायक दल के नेता प्रदीप यादव से भी नाराज हैं। प्रदीप यादव पर आरोप है कि वह किसी की नहीं सुनते। विधायक दल की बैठक भी नहीं बुलाते हैं। अपनी मनमर्जी करते हैं।
इधर, मंत्रियों की भी अपने मजबूरी है। सरकार में उनकी सुनी नहीं जा रही है। सभी विभागों में फंड की कमी है। इसलिए विकास कार्य नहीं हो पा रहा है। वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर दवा तो करते हैं कि वित्तीय संकट नहीं है। लेकिन ऐसी बात नहीं है। सच्चाई कुछ और है। वित्तीय संकट के कारण है विकास कार्य रुका हुआ है।
इधर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन राजनीतिक रूप से काफी मजबूत हो चुके हैं। अब वह अपने ढंग से सरकार चला रहे हैं। मंत्रियों की भी बहुत नहीं सुनी जाती है। कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल दबाव की स्थिति में नहीं है। इनकी अपनी मजबूरी है।
मुख्यमंत्री विदेश दौरे पर हैं। झारखंड में निवेश के लिए निवेशकों को आमंत्रित कर रहे हैं। उद्योग धंधा आए इसके लिए पहल कर रहे हैं। लेकिन उनके दौरे में उनकी पत्नी विधायक कल्पना सोरेन तो साथ में हैं पर उद्योग मंत्री संजय यादव तक साथ नहीं गए। उन्हें ले जाना उचित नहीं समझ गया। अब आप इसी से समझ सकते हैं कि इस सरकार में मंत्रियों की क्या हालत है। बेचारे बेबस हैं। कुछ बोल भी नहीं सकते हैं। इधर विधायकों की नाराजगी अलग है। इसलिए कह सकते हैं कि मंत्री बेबस और लाचार हैं। अब देखिए आगे क्या होता है।











