
Location: Garhwa
चाय की चुस्की
गढ़वा नगर परिषद के अध्यक्ष पद के दावेदार इन दिनों ठंडा पड़ गए हैं। खबर है कि दावेदारों के सामने कई तरह की दुविधा है। निवर्तमान वाले राजनीतिक पार्टी को ले दुविधा में है , क्योंकि लोग बताते हैं की दल भले ही बदल दिए हैं पर दिल उनका नहीं बदला है। चुनाव लड़ने की वर्षों से हसरत पाले निवर्तमान के प्रतिद्वदियों के सामने भी कम संकट नहीं है। नगर परिषद का चुनाव होने के समय को ले तो संशय है हीं । साथ ही पत्नी को लड़ावें अथवा खुद इसे लेकर भी दुविधा है। क्योंकि पत्नी को चुनाव लड़ाने की तैयारी में अब तक हाथ पांव मार रहे थे पर अब स्थिति बदल गई है। पिछड़ी महिला के लिए सुरक्षित सिट को हटाकर अब गढ़वा नगर परिषद के अध्यक्ष पद का सीट समान्य( जेनरल) कर दिया गया है। लिहाजा इसे लेकर भी परेशान है कि पता नहीं कैसे -कैसे दिग्गज आने वाले चुनाव में मैदान में आ जाएंगे।
इन्हीं सारी दुविधा के बीच संभावित उम्मीदवार ठंढ़ पड़ गए हैं।वरना याद कीजिए गर्मी के इस मौसम में टैंकर पर पानी पिला -पिलाकर समाज सेवा की दुहाई देने की परिपाटी कैसे बंद रहति। हलांकि हाईकोर्ट का राज्य सरकार पर चुनाव कराने के दबाव के बाद निकट भविष्य में ही चुनाव की उम्मीद जगी है। बावजूद अध्यक्ष पद के संभावित प्रत्याशियों की चहल कदमी फिलहाल जिस प्रकार से ठहरी हुई है उसमें कहीं ना कहीं दुविधा तो है ही, बस कुछ ही दिन का इंतजार है। संभव है अगले पखवारे तक अध्यक्ष पद कोई न कोई दावेदार ठहरे हुए पानी में पत्थर फेंककर समाज सेवा का तरंग न कहीं पैदा कर दे।
प्रशांत किशोर का नकल कर चुनाव मैदान में नेताजी
इन दोनों तापमान बढ़कर सातवें आसमान पर पहुंच गया है, चक्रवात से थोड़ी राहत की उम्मीद है पर गढ़वा अपने आप में निराला है। यहां अभी भी तापमान 47 डिग्री का पार है । बादल के ओट में भी गर्म हवा झुलसा रही है। खैर छोड़िए तापमान तो आज चढ़ा है कल मौसम के साथ उत्तर भी जाएगा। पर लगता है की गढ़वा जिले की सियासत में तापमान अब घटने की निकट भविष्य में कोई उम्मीद नहीं है। इसकी सुगबुगाहट पुराने दिन लौटाने की चाहत रखने वाले नेताजी ने चलो चलें गिरिनाथ के संग भ्रष्टाचार का होगा अंत
के नारे के साथ मैदान में उतर कर हीं दिया हैं ।खबर है कि नेताजी बिहार में जिस प्रकार से प्रशांत कुमार ने जनसुराज यात्रा के सहारे बिहार बदलने के नाम पर अपनी राजनीति चमकाने में लगे हैं। वैसे ही गिरिनाथ सिंह की भी गढ़वा विधान सभा की राजनीति बदलने की तलाश में पंचायत पंचायत अभियान शुरू कर दिए हैं। खबर है कि उनके साथ कैमरामैन से लेकर सोशल मीडिया के तमाम प्लेटफार्म पर राजनीति चमकाने का यंत्रों से लैस लाव लश्कर भी चल रहा है । कहने का मतलब की पूरी तरह से हाईटेक व्यवस्था है। ऐसे में गढ़वा विधानसभा की राजनीति तापमान घटने का आकलन करना निकल भविष्य में बेइमानी होगी क्योंकि जैसे-जैसे नेताजी का नए अवतार का रंग चढ़ेगा। वैसे- इनके प्रतिद्वंदी भी अपनी पैठ बढ़ाने के जुगाड़ में राजनीतिक पैंतरेबाज़ी चलेंगे हीं। ऐसे में तय है की आने वाले समय में विशेषकर गढ़वा विधानसभा की राजनीति तापमान बढ़ने ही वाली है।
विकास का रफ्तार है या विदाई का वक्त
इन दिनों गढ़वा जिला प्रशासन का विकास के प्रति बेचैनी देखते ही बन रही है। जिला मुख्यालय में आला अधिकारियों का बैठकों का दौर जारी है और तो और प्रखंडों में पहुंचकर पंचायत स्तर की विकास योजना की समीक्षा भी चल रही है। अच्छी बात है अभी लोकसभा चुनाव का परिणाम भी नहीं सामने आया है और प्रशासन अभी से विकास के प्रति भागदौड़ कर रही है।
हालांकि कुछ लोग प्रशासन के आला अधिकारियों के इस बड़ी विकास बेचैनी के पीछे उनके तबादले की भय को बड़ा कारण बता रहे हैं। चर्चा है कि आला कमान आला अधिकारी की स्वामीभक्ति में गिरावट से खासा नाराज है तथा किसी भी वक्त आचार संहिता समाप्त होने पर तबादले की चिट्ठी पहुंचवा सकते हैं ।लिहाजा विदाई से पहले कुछ कर गुजरने की तमन्ना में विकास को लेकर बेचैनी बढ़ गई है। वरना कौन नहीं जानता,? कि मनरेगा योजना जॉब कार्ड धारी मजदूरों के बजाय बिचौलियों के गिरफ्त में है मनरेगा का कुआं, तालाब, बावली मजदूरों के बजाय खुलेआम जेसीबी मशीन से खोदे जाते हैं। गांव हो अथवा शहर लोग गर्मी के इस मौसम में एक-एक बूंद पानी के लिए कई इलाक़ों में महीनों से तरस रहे हैं आए दिन विभिन्न अखबारों चैनलों में लोगों को प्यास बुझाने में हो रही तकलीफ की चर्चा है ।पर अब जाकर तब प्रशासन प्यास बुझाने की छटपटाहट दिख रही है जब बरसात का समय नजदीक आ गया है। ऐसे में विकास योजनां, आम लोगों हित के प्रति अधिकारियों की बेचैनी है अथवा विदाई की छटपटाहट ।गौर करने की जरूरत है। बस कुछ ही दिन की बात है ।चर्चा में कितना दाम है सामने आ ही जाएगा।