घाटशिला उपचुनाव को लेकर मुख्यमंत्री ने बदली रणनीति, हेमंत ने किसी को नहीं बनाया मंत्री, क्या है वजह

Location: रांची

रांची; बिहार विधानसभा चुनाव की घोषणा के साथ झारखंड में घाटशिला विधानसभा उपचुनाव की घोषणा भी हो गई। जिसकी संभावना थी वही हुआ। लेकिन महत्वपूर्ण यह कि हेमंत सोरेन ने अपनी रणनीति बदल दी। चुनाव की घोषणा से पहले उन्होंने शिक्षा मंत्री रहे स्वर्गीय रामदास सोरेन के बेटे सोमेश सोरेन को मंत्री नहीं बनाया। अब बिना मंत्री बने ही सोमेश सोरेन या उनकी पत्नी को विधानसभा चुनाव लड़ना होगा।
        मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने चुनाव में जाने को लेकर अपनी रणनीति क्यों बदली ? अंदरखाने क्या मामला है यह अभी सामने नहीं आया है। लेकिन कोई न कोई बात तो जरूर है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मधुपुर और डुमरी उपचुनाव जीतने के लिए क्रमशः स्वर्गीय हाजी हुसैन अंसारी के बेटे हफीजुल हसन अंसारी और स्वर्गीय जगरनाथ महतो की पत्नी बेबी देवी को चुनाव के पूर्व कैबिनेट मंत्री बना दिया था। झामुमो के टिकट पर दोनों अपने-अपने विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीतने में सफल रहे। मुख्यमंत्री की रणनीति सफल रही। इसलिए इस बार भी यही कयास लगाया जा रहा था कि घाटशिला उप चुनाव की घोषणा से पहले रामदास सोरेन के बेटे सोमेश सोरेन को भी मंत्री बनाया जाएगा। उम्मीद थी कि नवरात्र में कैबिनेट विस्तार होगा और सोमेश सोरेन मंत्री बन जाएंगे।
लेकिन नवरात्र के दौरान जब मंत्री नहीं बनाया गया तभी से मुझे ऐसा लगने लगा था कि मुख्यमंत्री ने अपनी रणनीति बदल ली है। वह चुनाव से पहले किसी को मंत्री नहीं बनाएंगे।
क्योंकि ऐसी संभावना थी कि 6 से 8 तारीख के बीच बिहार विधानसभा चुनाव की घोषणा होगी और इसी के साथ घाटशिला चुनाव की भी घोषणा होगी। इसकी जानकारी मुख्यमंत्री को भी थी। बावजूद उन्होंने किसी को मंत्री नहीं बनाया।
किसी को मंत्री नहीं बनाए जाने के पीछे एक कारण यह भी हो सकता है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सोमेश सोरेन के बदले रामदास सोरेन की पत्नी को मंत्री बनना चाहते हो या कोई अन्य उम्मीदवार को लेकर मुख्यमंत्री के मन में बात चल रही होगी। वह निर्णय नहीं ले पा रहे होंगे, इसलिए उन्होंने इस फैसले को टाल दिया और अब इसी बीच चुनाव की घोषणा हो गई।
अब यह साफ हो गया कि मधुपुर और डुमरी उपचुनाव को लेकर मुख्यमंत्री ने जो रणनीति  बनाई थी उसको उन्होंने बदल दिया है अब उनके मन में कोई  नई रणनीति है। अब आगे क्या फैसला होगा इसके लिए थोड़ा इंतजार करना होगा।
इधर, भाजपा से पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन के बेटे बाबूलाल सोरेन को ही उम्मीदवार बनाए जाने की संभावना है। हालांकि यहां से रमेश हांसदा भी भाजपा से उम्मीदवारी के लिए जोर लगाए हुए हैं। लेकिन केंद्रीय नेतृत्व अभी चंपई सोरेन को नाराज नहीं करना चाहेगा इसलिए बाबूलाल को भी टिकट मिलने की संभावना अधिक है। चंपई सोरेन और बाबूलाल सोरेन घाटशिला इलाके में पिछले कुछ दिनों से सक्रिय भी हैं।

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  • Sunil Singh

    Sunil Singh is Reporter at Aapki khabar from Ranchi, Jharkhand.

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