Location: Garhwa
गढ़वा। जिले में बालू से मलाई खाने का खेल अब बीते दिनों की बात हो जाएगी। उपायुक्त के आदेश पर 18 बालू घाटों की ई-नीलामी की प्रक्रिया शुरू होते ही वह पूरा तंत्र सकते में है, जो अब तक बालू से कमाई का सपना बुन रहा था।
बताया जाता है कि कई अधिकारियों ने भारी-भरकम खर्च कर गढ़वा में पदस्थापना कराई थी। उनकी उम्मीद थी कि “बालू घाट” खर्च की भरपाई कर देंगे। लेकिन ई-नीलामी ने उनकी सारी गणना बिगाड़ दी है।
बालू माफियाओं और उनके संरक्षक सफेदपोशों की धंधेबाजी पर भी इस फैसले ने सीधा प्रहार किया है। वही विभाग, जो प्रति रात की दर से “अवैध बालू परमिट” काटकर मोटी कमाई करता था, अब सबसे ज्यादा मायूस है। उनकी “रातों की दुकानदारी” पर ताला लगना तय है।
जनता का मानना है कि अगर यह ई-नीलामी पारदर्शी तरीके से पूरी हो गई तो न सिर्फ बालू सस्ता होगा बल्कि गढ़वा से बालू माफियाओं का साम्राज्य भी ढह जाएगा। फिलहाल, यह फैसला अधिकारियों और माफियाओं के “रेत के महल” पर बुलडोज़र साबित हो रहा है।











