Location: Garhwa
गढ़वा:
भारत सरकार के केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की पहल पर चलाए गए 100 दिवसीय गहन जागरूकता अभियान के तहत जिले में संचालित ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ यात्रा का समापन किया गया। समापन अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में लोहरदगा ग्राम स्वराज्य संस्थान के प्रतिनिधियों ने कहा कि अभियान को मिली सकारात्मक प्रतिक्रिया से यह भरोसा बढ़ा है कि बाल विवाह मुक्त गढ़वा और बाल विवाह मुक्त भारत का लक्ष्य जल्द हासिल किया जा सकता है।
बताया गया कि लोहरदगा ग्राम स्वराज्य संस्थान बाल अधिकारों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए कार्य करने वाले देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के सहयोगी संगठनों में शामिल है। यह नेटवर्क देशभर में 250 से अधिक नागरिक समाज संगठनों के साथ मिलकर बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए काम कर रहा है।
जिले में बाल विवाह मुक्ति रथ को उप विकास आयुक्त, गढ़वा ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। 12 दिनों तक चले इस अभियान के दौरान रथ ने जिले में 2257 किलोमीटर की यात्रा की। इस दौरान यह रथ जिले के 8 प्रखंडों के 94 गांवों तक पहुंचा और लगभग 35 हजार लोगों को बाल विवाह के खिलाफ जागरूक किया गया।
देशव्यापी अभियान के तहत चलाया गया कार्यक्रम
‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान के एक वर्ष पूरा होने के अवसर पर महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने 4 दिसंबर 2025 को देशव्यापी 100 दिवसीय गहन जागरूकता अभियान की घोषणा की थी। जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के सहयोगी संगठनों ने इस अभियान की अगुवाई करते हुए देश के 439 जिलों में ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ निकालकर लोगों को जागरूक करने का काम किया।
इस रथ के माध्यम से गांवों और कस्बों में घूम-घूमकर लोगों को बाल विवाह के स्वास्थ्य, शिक्षा और आजीविका पर पड़ने वाले दुष्परिणामों की जानकारी दी गई। साथ ही यह भी बताया गया कि बाल विवाह कानूनन दंडनीय अपराध है। सुदूर क्षेत्रों तक पहुंचने के लिए मोटरसाइकिल और साइकिल कारवां के जरिए भी जागरूकता संदेश पहुंचाया गया।
परिवर्तनकारी अभियान बताया
लोहरदगा ग्राम स्वराज्य संस्थान के सचिव सीपी यादव ने इस अभियान को परिवर्तनकारी बताते हुए कहा कि यह केवल प्रतीकात्मक यात्रा नहीं थी, बल्कि समाज में बदलाव का संदेश लेकर चलने वाला अभियान था, जिसे लोगों ने स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि बाल विवाह किसी सामाजिक परंपरा का हिस्सा नहीं बल्कि बच्चों के अधिकारों का गंभीर उल्लंघन है, जो बच्चियों को कुपोषण, अशिक्षा और गरीबी के दुष्चक्र में धकेल देता है।
उन्होंने कहा कि सरकार, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के सहयोग से यह अभियान जनभागीदारी वाला व्यापक आंदोलन बन गया है। सभी के सहयोग से बाल विवाह के खात्मे के लिए कानून, सुरक्षा और जवाबदेही के संदेश को जन-जन तक पहुंचाया गया।
तीन चरणों में चला जागरूकता अभियान
अभियान को तीन चरणों में संचालित किया गया। पहले चरण में शैक्षणिक संस्थानों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। दूसरे चरण में धर्मगुरुओं को जोड़कर उनसे अनुरोध किया गया कि विवाह संपन्न कराने से पहले वर-वधू की आयु की जांच करें और बाल विवाह कराने से इनकार करें।
तीसरे चरण में पंचायत स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम चलाए गए। इसके साथ ही कैटरर्स, सजावट करने वालों, बैंक्वेट हॉल संचालकों, बैंड और घोड़ी वालों से भी अपील की गई कि वे बाल विवाह में अपनी सेवाएं न दें, क्योंकि ऐसे मामलों में सहयोग देने पर भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
अभियान के माध्यम से बाल विवाह मुक्त गढ़वा के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई।












