Location: Garhwa

गढ़वा शहर के मेन रोड स्थित सिद्धि विनायक आयुर्वेदिक औषधालय इन दिनों एक अनोखे ‘मेहमान’ को लेकर चर्चा में है। औषधालय के मालिक एवं गढ़वा जिला केमिस्ट एसोसिएशन के जिला सचिव नंद किशोर श्रीवास्तव के अनुसार, पिछले करीब 11 महीनों से एक छोटी-सी गाय की वछिया रोजाना सड़क पर घूमते-फिरते उनकी दुकान में आ जाती है — और यहां दिन में 4 से 5 घंटे तक आराम से बैठ रहती है।
चौंकाने वाली बात यह है कि न तो किसी को उसके मालिक का पता है, न ही उसके घर का, लेकिन वछिया को जैसे इस औषधालय से खास लगाव हो गया हो। हर दिन वह बड़े सुकून से दुकान के अंदर बैठती है, आने-जाने वाले लोगों को निहारती है और बिना किसी शरारत या उधम के शांत भाव से समय बिताती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह वछिया दुकान के माहौल से इतनी घुल-मिल गई है कि मानो यह उसका अपना आश्रय स्थल हो। कई लोग इसे “औषधालय की ब्रांड एम्बेसडर” तक कहने लगे हैं। वहीं बच्चे इसे प्यार से “दुकान वाली गौरी” नाम से पुकारते हैं।
दुकान मालिक नंद किशोर श्रीवास्तव बताते हैं—
“हमने कई बार पता लगाने की कोशिश की कि यह किसकी है, कहाँ से आती है, लेकिन कुछ पता नहीं चला। फिर भी यह रोज हमारे यहाँ आती है, बैठती है, जैसे इसे यहाँ सुरक्षित और अपना-सा लगता है।”
स्थानीय बाजार में इस अनोखी वछिया ने अलग ही पहचान बना ली है। लोग कहते हैं—“जहाँ दवा मिले और सुकून मिले, वहीं तो भलाई है। शायद वछिया ने भी यही सोच लिया होगा!”
गढ़वा मेन रोड पर यह वछिया अब सिर्फ एक आवारा पशु नहीं, बल्कि एक भावनात्मक कहानी बन गई है—
दुकान की ‘शांत ग्राहक’, जिसने किसी का घर भले छोड़ दिया हो, पर औषधालय में उसे अपनापन मिल गया है।












