Location: Manjhiaon
झारखंड में निकाय चुनाव की घोषणा होते ही गढ़वा जिले के नगर पंचायत क्षेत्र में राजनीतिक हलचल अचानक तेज हो गई है। इस बार का नगर पंचायत चुनाव कई मायनों में खास और दिलचस्प बन गया है। सबसे बड़ा कारण है आरक्षण में बदलाव—पिछले चुनाव में पिछड़ी जाति महिला के लिए सुरक्षित यह सीट इस बार सामान्य कर दी गई है।
आरक्षण हटते ही चुनावी मैदान में संभावित प्रत्याशियों की बाढ़ सी आ गई है। नगर पंचायत अध्यक्ष पद के लिए कई चर्चित और प्रभावशाली नाम सामने आ रहे हैं। इनमें पूर्व अध्यक्ष सुमित्रा देवी, मारुति नंदन सोनी, सतेश्वरी दुबे, गिरीश पांडे, विजय जायसवाल की पत्नी शोभा जायसवाल और वीरेंद्र चंद्रवंशी प्रमुख रूप से शामिल हैं। प्रत्याशियों की संख्या और विविधता ने चुनावी माहौल को और अधिक रोचक बना दिया है।
गढ़वा नगर पंचायत क्षेत्र में कुल 12 वार्ड हैं। यहां 7,757 पुरुष और 7,509 महिला, यानी कुल 15,266 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। मतदान के लिए 17 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। जानकारी के अनुसार 23 फरवरी को बैलेट पेपर के माध्यम से मतदान कराया जाएगा।
हालांकि चुनावी सरगर्मी के बीच एक गंभीर और संवेदनशील मुद्दा भी सामने आया है। नगर पंचायत क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले खजूरी नावाडीह पंचायत के वार्ड संख्या 8, 9, 10, 11 और 12 के लोगों ने चुनाव बहिष्कार का ऐलान किया है। इन लोगों का कहना है कि वे पूरी तरह से ग्रामीण पृष्ठभूमि से आते हैं और उन्हें नगर पंचायत में शामिल करना उनके हितों के खिलाफ है। उनका स्पष्ट मत है कि उन्हें पहले की तरह ग्रामीण क्षेत्र में ही रखा जाए।
इस मुद्दे को लेकर खजूरी क्षेत्र में असंतोष गहराता जा रहा है। बताया जा रहा है कि अशोक पाल द्वारा झारखंड उच्च न्यायालय में मुकदमा दाखिल करने की भी चर्चा जोरों पर है। यदि मामला न्यायालय तक पहुंचता है, तो इसका असर आने वाले दिनों में चुनावी प्रक्रिया पर भी पड़ सकता है।
कुल मिलाकर गढ़वा नगर पंचायत चुनाव इस बार आरक्षण परिवर्तन, दावेदारों की लंबी फेहरिस्त और क्षेत्रीय असंतोष के चलते बेहद दिलचस्प मोड़ पर खड़ा है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन, न्यायालय और मतदाता इस स्थिति को किस दिशा में ले जाते हैं और इसका अंतिम परिणाम क्या निकलता है।











