Location: Garhwa
गढ़वा चैंबर ऑफ कॉमर्स में नेतृत्व को लेकर गंभीर टकराव की स्थिति बन गई है। संगठन के भीतर दो गुट साफ तौर पर सामने आ चुके हैं — एक ओर संगठन की निष्क्रियता और चुनाव न होने को आधार बनाकर नेतृत्व परिवर्तन की मांग करने वाला गुट है, तो दूसरी ओर वर्तमान नेतृत्व को वैध बताते हुए नियमों का पालन करने की बात कही जा रही है।
सोमवार को जिले के कई प्रमुख व्यापारियों की उपस्थिति में एक विशेष पत्रकार वार्ता आयोजित की गई। इसमें 13 वर्षों से चैंबर में चुनाव नहीं होने और व्यापारी हितों की उपेक्षा का मुद्दा उठाया गया। आरोप लगाए गए कि संगठन सिर्फ रसूखदार मंच बनकर रह गया है और इसका भवन तक बदहाल स्थिति में है। व्यापारियों के आग्रह पर 25 सदस्यीय संयोजक मंडल का गठन किया गया, जिसने पूर्व अध्यक्ष को कार्यवाहक अध्यक्ष घोषित कर दिया। कार्यवाहक अध्यक्ष ने साफ कहा कि उनकी प्राथमिकता केवल व्यापारी हित हैं और संगठन को सक्रिय करना उनका उद्देश्य है।
इसी बैठक के अगले दिन मंगलवार को चैंबर के आजीवन सदस्यों ने अलग से प्रेस वार्ता कर संतोष केसरी पर गंभीर आरोप लगाए। चैंबर अध्यक्ष बबलू पटवा ने कहा कि संतोष केसरी को वर्ष 2016 में ही संगठन से निष्कासित कर दिया गया था, ऐसे में उनका बार-बार खुद को कार्यकारी अध्यक्ष घोषित करना संगठन के संविधान और बाईलॉज के खिलाफ है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर वे सदस्य हैं तो उसकी वैध रसीद दिखाएं। अन्य वक्ताओं ने आरोप लगाया कि संतोष केसरी ने निजी तौर पर बैठक बुलाकर कुछ चुनिंदा लोगों की मौजूदगी में खुद को अध्यक्ष घोषित किया, जो गलत है।
इस पूरे घटनाक्रम से साफ हो गया है कि चैंबर में नेतृत्व को लेकर टकराव बढ़ता जा रहा है। एक पक्ष संगठन को निष्क्रियता से उबारने के नाम पर नए नेतृत्व की ओर बढ़ रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इसे नियमों के खिलाफ बताया रहा है। इससे संगठन में गुटबाजी गहराने लगी है और दोनों गुट अपनी-अपनी स्थिति को सही ठहराने में लगे हैं।
यदि यह टकराव जल्द नहीं सुलझा, तो संगठन की छवि और विश्वसनीयता दोनों को नुकसान पहुंच सकता है। व्यापारी समुदाय की एकता और संगठन की गरिमा को बचाने के लिए आवश्यक है कि आपसी मतभेदों को संवाद और लोकतांत्रिक प्रक्रिया से सुलझाया जाए।











