Location: Garhwa
गढ़वा। संस्कार भारती झारखंड प्रांत के प्रांतीय कला धरोहर संयोजक नीरज श्रीधर ‘स्वर्गीय’ ने “आपन सरस्वतीया” अभियान और सरस्वती नदी के पुनर्जीवन के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा है कि गढ़वा की सरस्वती नदी को नया जीवन देने के लिए चलाया जा रहा अभियान आने वाले समय में एक मिसाल के रूप में याद किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि कभी हजारों लोगों की प्यास बुझाने वाली सरस्वती नदी अतिक्रमण, गंदगी और उपेक्षा के कारण अपने अस्तित्व के संकट से जूझ रही थी। नदी में नालियों का पानी, शौचालयों का अपशिष्ट और कचरा डाले जाने से उसकी स्थिति लगातार खराब होती चली गई थी।
नीरज श्रीधर ने कहा कि सरस्वती नदी को बचाने के लिए सबसे पहले युवा अभिषेक भारद्वाज ने आवाज उठाई। भीषण गर्मी में रंका मोड़ पर पोस्टर लेकर खड़े होकर उन्होंने लोगों का ध्यान नदी की ओर आकर्षित किया। बाद में सदर एसडीएम संजय कुमार पांडेय की नजर इस पहल पर पड़ी और उन्होंने इसे जनआंदोलन का रूप देने का कार्य किया।
उन्होंने कहा कि एसडीएम संजय कुमार पांडेय ने केवल प्रशासनिक अधिकारी की भूमिका नहीं निभाई, बल्कि स्वयं मैदान में उतरकर श्रमदान किया और लोगों को अभियान से जोड़ा। उनके नेतृत्व में “आपन सरस्वतीया” अभियान शुरू हुआ, जिसमें समाजसेवियों, व्यापारियों, सामाजिक संगठनों तथा आम नागरिकों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।
नीरज श्रीधर के अनुसार, इस अभियान के कारण लोगों की सोच में बदलाव आया है। जो लोग कभी नदी को प्रदूषित करते थे, वे अब उसकी सफाई और संरक्षण के लिए आगे आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह अभियान इस बात का उदाहरण है कि प्रशासन और समाज मिलकर किसी भी प्राकृतिक धरोहर को पुनर्जीवित कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि पौराणिक कथाओं में भगीरथ ने गंगा को धरती पर लाने का कार्य किया था। उसी प्रकार गढ़वा में एसडीएम संजय कुमार पांडेय ने जनसहयोग और अपने समर्पण के बल पर सरस्वती नदी को बचाने का संकल्प लिया है। आने वाली पीढ़ियां इस प्रयास को अवश्य याद रखेंगी।
नीरज श्रीधर ने विश्वास व्यक्त किया कि सरस्वती नदी का संरक्षण और पुनर्जीवन अभियान आगे भी जारी रहेगा तथा यह पूरे समाज को पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रेरित करता रहेगा।











