Location: Shree banshidhar nagar
श्री बंशीधर नगर
जहां समाज का एक वर्ग अपने माता-पिता को वृद्धा आश्रम में छोड़कर उनसे नाता तोड़ लेता है, वहीं श्री बंशीधर नगर के सेवानिवृत्त शिक्षक एवं शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष सह विधायक प्रतिनिधि कमलेश्वर पांडेय ने इन छोड़े गए बुजुर्गों के जीवन में फिर से मुस्कान लौटा दी है।
पांडेय जी ने एक अनोखी पहल की है — वे प्रतिदिन कुछ समय निकालकर स्थानीय वृद्धा आश्रम पहुंचते हैं। वहां वे बुजुर्गों को न केवल शिक्षा से जोड़ते हैं, बल्कि जीवन से जुड़ी प्रेरक कहानियां, कविताएं और संस्मरण भी सुनाते हैं। उनकी इस पहल ने आश्रम के वातावरण को पूरी तरह बदल दिया है।
पहले जहां सन्नाटा पसरा रहता था, अब वहां हर सुबह हंसी-खुशी की गूंज सुनाई देती है। आश्रम में रहने वाले अशर्फी पाल, रामसकल मौर्या, सीता राम मिस्त्री, फूलमती कुंवर और सुबचनी देवी कहते हैं कि अब उन्हें यहां बहुत अच्छा लगता है। “पांडेय जी न केवल हमें शिक्षा देते हैं, बल्कि हमारे अकेलेपन को भी दूर करते हैं,” वे मुस्कुराते हुए कहते हैं।
कमलेश्वर पांडेय का मानना है कि — “इन बुजुर्गों ने अपने जीवन में बहुत कुछ दिया है। अब समाज का कर्तव्य है कि उनके अंतिम पड़ाव को खुशहाल बनाया जाए। मेरा प्रयास बस इतना है कि वे खुद को अकेला न महसूस करें।”
वृद्धा आश्रम के संचालक और स्टाफ भी इस बदलाव से उत्साहित हैं। उनका कहना है कि पहले जहां उदासी छाई रहती थी, अब वहां चर्चा, हंसी-मजाक और सकारात्मक माहौल है।
कमलेश्वर पांडेय की यह पहल मानवता का एक अद्भुत उदाहरण बन गई है। श्री बंशीधर नगर की यह संवेदनशील पहल आज पूरे जिले के लिए प्रेरणा का स्रोत है — यह संदेश देती है कि थोड़ा समय और संवेदना किसी के जीवन में उजाला भर सकती है।












