Location: पटना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को मुजफ्फरपुर की चुनावी सभा में बिहार के विपक्षी गठबंधन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि बिहार को फिर से “जंगल राज” और “कट्टा राज्य” में नहीं लौटने दिया जाएगा। मोदी ने अपने भाषण में प्रतिपक्ष को पाँच “के” शब्दों—“कट्टा, कुशासन, कटुता, करप्शन और क्रूरता”—से परिभाषित किया। उन्होंने कहा कि इन दलों के शासनकाल में करीब 35 हजार अपहरण हुए और बिहार का नाम अपराध से जोड़ा गया।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में मुजफ्फरपुर और आसपास के इलाकों में हुए पुराने अपहरण मामलों, विशेष रूप से गोलू अपहरण कांड का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे हादसे “जंगल राज” की पहचान थे। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने कानून-व्यवस्था को मजबूत किया है और अपराध पर अंकुश लगाया है।
मोदी ने सभा में स्थानीय बोली और छठ पूजा जैसी सांस्कृतिक परंपराओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बिहार की आस्था और संस्कृति को “राजनीतिक स्वार्थ” से ऊपर रखा जाना चाहिए।
सभा में प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि विपक्ष सत्ता में आने पर विकास के बजाय “कट्टा और भ्रष्टाचार की राजनीति” लाएगा। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे “सुरक्षित बिहार” के लिए एनडीए को समर्थन दें।
मुजफ्फरपुर की सभा में प्रधानमंत्री ने चुनावी मुद्दे को भय और स्मृति के दो पहलुओं पर आधारित किया—पहला, “जंगल राज” की पुनरावृत्ति का डर, और दूसरा, अपराध-प्रधान शासनकाल की पुरानी यादों का पुनः स्मरण। उन्होंने स्थानीय घटनाओं और प्रतीकों का उपयोग कर यह संदेश दिया कि बिहार को फिर “कट्टा राज्य” नहीं बनने देना है।
भाषण का राजनीतिक उद्देश्य स्पष्ट था—विपक्ष को अपराध और कुशासन के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत करना। हालांकि विकास, रोज़गार और शिक्षा जैसे ठोस विषयों पर कम चर्चा हुई। सभा भावनात्मक और सांस्कृतिक जुड़ाव पर केंद्रित रही, जबकि नीतिगत विवरणों की अपेक्षा अधूरी दिखी।
मुजफ्फरपुर की सभा ने प्रधानमंत्री के अभियान की दिशा तय की—“भय से सावधानी” और “स्थिरता के समर्थन” का संदेश। यह रणनीति चुनावी दृष्टि से प्रभावी हो सकती है, परंतु मतदाताओं के लिए अगला सवाल यही रहेगा कि सुरक्षा के साथ विकास का ठोस खाका क्या है।











