
Location: रांची
पलामू प्रमंडल में विधानसभा सभा की 9 सीट हैं। इस बार के चुनाव में बिश्रामपुर और गढ़वा हॉट सीट बनने वाली है। इन सीटों पर दिलचस्प मुकाबला होगा। वहीँ इंडिया गठबंधन की परीक्षा भी होगी। बिश्रामपुर का राजनीतिक समीकरण इस बार कुछ अलग ही संकेत दे रहा है। बिश्रामपुर को लेकर राजद और कांग्रेस में घमासान होना तय है। इस सीट को लेकर गठबंधन टूट भी सकता?
2019 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस, झारखंड मुक्ति मोर्चा और राजद में गठबंधन था। गठबंधन के तहत झारखंड मुक्ति मोर्चा 43 कांग्रेस 31 और राजद ने 7 सीटों पर चुनाव लड़ा था। पलामू प्रमंडल की बात करें तो कांग्रेस बिश्रामपुर, भवनाथपुर, डाल्टनगंज, पाकी और और मनिका से चुनाव लड़ी थी । जबकि झारखंड मुक्ति मोर्चा गढ़वा और लातेहार और राजद ने हुसैनाबाद छतरपुर से चुनाव लड़ा। पांच सीटों में से कांग्रेस सिर्फ एक सीट मनिका जीत पाई । जबकि झामुमो ने दोनों सीटों पर जीत हासिल की। राजद का खाता भी नहीं खुला। पलामू प्रमंडल की 9 सीटों में भाजपा को पांच और एनसीपी को एक सीट मिली थी।
राष्ट्रीय जनता दल इस बार इंडिया गठबंधन में 22 सीटों पर दावेदारी कर रहा है। राजद ने कहा है कि पलामू प्रमंडल में उसकी सबसे मजबूत दावेदारी है। इसलिए उसे अधिकांश सीट चाहिए। राजद को इंडिया गठबंधन के तहत 22 सीट मिलना संभव नहीं है। इसलिए गठबंधन से राजद के बाहर होने की उम्मीद जताई जा रही है।
राजद और कांग्रेस में बिश्रामपुर को लेकर घमासान होना तय है। पिछली बार यह सीट कांग्रेस के खाते में थी। कांग्रेस प्रत्याशी पूर्व मंत्री ददई दुबे को बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा था । वह मुकाबले से ही बाहर हो गए थे। इस बार राजद बिश्रामपुर दावा ठोक रहा है। पिछले चुनाव में निर्दलीय लड़े नरेश सिंह बहुत कम मतों से पीछे रह गए थे । नरेश सिंह राजद में हैं। यहां से नरेश सिंह के साथ-साथ राष्ट्रीय जनता दल के प्रदेश उपाध्यक्ष श्याम दास सिंह भी मजबूत दावेदार हैं। श्याम दास सिंह पिछले 5 वर्षों से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। नरेश सिंह भी चुनाव लड़ने को तैयार हैं। यहां राजद के पास दो मजबूत दावेदार हैं । इसलिए राजद किसी कीमत पर बिश्रामपुर सीट छोड़ने को तैयार नहीं है।
इधर कांग्रेस में ददई दुबे अब कमजोर हो चुके हैं। उनकी उम्र भी अधिक हो गई है। यहां कांग्रेस के पास कोई मजबूत दावेदार नहीं है। सूत्रों के अनुसार डाल्टनगंज से लगातार दो बार से चुनाव हार रहे कांग्रेस नेता केएन त्रिपाठी की नजर बिश्रामपुर सीट पर है। डाल्टनगंज के बदले वह इस बार बिश्रामपुर से चुनाव लड़ना चाहते हैं। यहां का समीकरण अभी डाल्टनगंज के मुकाबले मजबूत दिख रहा है। बहरहाल बिश्रामपुर पर कांग्रेस और राजद के बीच मामला फंस सकता है। कांग्रेस भी आसानी से यह सीट छोड़ने को तैयार नहीं होगी। कांग्रेस व राजद में टकराव के कारण गठबंधन टूट सकता है।
इधर गढ़वा में पूर्व विधायक गिरिनाथ सिंह ने चुनाव लड़ने की तैयारी तेज कर दी है। उनके मैदान में आने से मुकाबला दिलचस्प होने वाला है। यहां के विधायक मिथिलेश ठाकुर मंत्री हैं। ऐसे में गिरिनाथ सिंह, मिथिलेश ठाकुर और भाजपा के बीच मुकाबला होगा। गिरिनाथ सिंह निर्दलीय लड़ेंगे या किसी दल से यह अभी तय नहीं है। फिलहाल तो वह राजद में हैं। लेकिन गठबंधन टूटा तो वह राजद के टिकट पर लड़ेंगे, नहीं तो फिर निर्दलीय लड़ेंगे। वह कुछ और संभावनाओं पर ही विचार कर रहे हैं। संभव है उनके लिए यह आखिरी चुनाव होगा । इस सेंटीमेंट के साथ मतदाताओं के बीच वह जाएंगे । गढ़वा से 5 बार विधायक रह चुके हैं। क्षेत्र में उनकी अच्छी पकड़ है।
इधर, मिथिलेश ठाकुर ने भी अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। विकास कार्यों से उन्होंने अपनी एक अलग पहचान बनाई। हर चुनौती स्वीकार करने की स्थिति में वह हैं। समर्थकों की फौज इनके साथ है। साधन संपन्न हैं। भाजपा भी यहां मजबूत स्थिति में है। बहुत संभव है कि भाजपा फिर सत्येंद्र तिवारी को ही मौका दे। भाजपा में कई अन्य दावेदार भी हैं । इसलिए गढ़वा इस बार हॉट सीट बनने वाली है।