Location: Garhwa
संगीत कला महाविद्यालय में स्वरों की मलिका, गायिकी की जादूगरनी पद्मश्री आशा भोसले जी के निधन पर शोक सभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर संगीत के सभी छात्र-छात्राएं, कलाकार एवं कला प्रेमियों ने नम आंखों से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
श्रद्धांजलि सभा में महाविद्यालय के निदेशक प्रमोद सोनी ने कहा कि आशा भोसले जी एक युग की संगीत धड़कन थीं। उनके निधन से स्वर्णिम संगीत युग का अंत हो गया। उन्होंने लगभग 80 वर्षों तक अपने स्वरों से संगीत की बगिया को रंग-बिरंगे गीतों से सजाया, जिसकी खुशबू भारत ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व में फैली। उनके गीत सदियों तक फिजाओं में गूंजते रहेंगे।
मेलोडी ग्रुप के निदेशक दया शंकर गुप्ता ने कहा कि आशा ताई इस सदी की महान गायिका थीं। उन्होंने मात्र 12 वर्ष की उम्र में ही फिल्मी जगत में अपने गायन की शुरुआत कर दी थी। उन्होंने शास्त्रीय, आधुनिक, भजन, क़व्वाली एवं लोकगीत सहित लगभग 22 भाषाओं में 12 हजार से अधिक गीत गाए। उनके गीतों के कारण आज भी कलाकार अपनी गायिकी को जीवित रखे हुए हैं। उनका मानना था कि इस सदी में उनकी जैसी मखमली आवाज मिलना कठिन है।
विजय प्रताप देव ने भावुक होकर कहा, “अभी न जाओ छोड़ कर, कि दिल अभी भरा नहीं।” उन्होंने बताया कि मां सरस्वती की दो अनमोल पुत्रियां लता मंगेशकर और आशा भोसले के साथ संगीत के स्वर्णिम काल की शुरुआत हुई थी, और अब उनके निधन से वह युग समाप्त हो गया।
वरिष्ठ कलाकार गोपाल प्रसाद कश्यप ने कहा कि आशा ताई एक महान गायिका ही नहीं, बल्कि एक महान व्यक्तित्व भी थीं। उनका संगीत एक अथाह समंदर की तरह है, जिसका न आदि है और न अंत। वे हमेशा हम सभी के दिलों में जीवित रहेंगी।
इस अवसर पर बड़ी संख्या में संगीत के छात्र-छात्राएं एवं वरिष्ठ कलाकार उपस्थित रहे।











