Location: पलामू
मेदिनीनगर।पलामू जिला मुख्यालय के छह मुहान चौक स्थित प्रसिद्ध मंगला गौरी मंदिर में अंग्रेजी नववर्ष के अवसर पर हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। लोगों ने नए वर्ष की शुरुआत मां के दर्शन और पूजा-अर्चना से की।नववर्ष की अहले सुबह चार बजे मंदिर में विशेष आरती का आयोजन किया गया।इसके पश्चात भगवती का भोग अर्पित किया गया।सुबह छह बजे से श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला शुरू हुआ जो दिनभर जारी रहा।पुजारी ने बताया कि नए वर्ष के दिन 10 से 12 हजार श्रद्धालु मां के दर्शन के लिए मंदिर पहुंचते थे।वही भीड़ को नियंत्रण करने के लिए सहायक पुलिस के जवान हरेंद्र कुमार,धर्मेंद्र कुमार और शीतल कुमार मुख्य रूप से मंदिर के पास उपस्थित थे।मंगला गौरी मंदिर की मान्यता अत्यंत प्राचीन है. मंदिर के गर्भगृह में मां भगवती प्राकृतिक रूप में विराजमान हैं, जहां पिंड के रूप में देवी का पूजन किया जाता है. गर्भगृह में भगवान शिव, भगवान गणेश और मां दुर्गा की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं. मंदिर का विकास वर्ष 1953 और 1980 के बीच हुआ, जिसके बाद यह एक विशाल और भव्य धार्मिक स्थल के रूप में स्थापित हुआ. परंपरा के अनुसार पुरी के शंकराचार्य द्वारा यहां भगवान शिव, माता दक्षिणेश्वर काली, मंगला काली और अन्य देवी-देवताओं की स्थापना कराई गई थी।वही मंदिर के प्रधान पुजारी सुरेश चंद्र पांडेय ने बताया कि मां दक्षिणेश्वर काली, जिन्हें मंगला काली के नाम से भी जाना जाता है, के दर्शन मात्र से मंगली दोष और अष्टमेश मंगला का प्रभाव समाप्त हो जाता है. शास्त्रों में इसका उल्लेख मिलता है, जिसके कारण यहां विवाह से जुड़ी मनोकामनाओं को लेकर बड़ी संख्या में युवक-युवतियां और उनके परिजन पूजा-अर्चना करने पहुंचते हैं. श्रद्धालु जोड़ा नारियल, चुनरी और आभूषण अर्पित कर मां से सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।मंदिर परिसर में माता दक्षिणेश्वर काली, मां मंगला काली और माता भगवती के मुख्य दरबार के साथ-साथ जगतदात्रिका, सप्तमात्रिका, शिवलिंग, राम-सीता दरबार, माता शीतला, पंचमुखी हनुमान, रामकृष्ण परमहंस और श्रीमती सारदा देवी की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं. नए वर्ष के अवसर पर श्रद्धा, आस्था और भक्ति का यह संगम मंगला गौरी मंदिर को विशेष पहचान देता है. इस अवसर पर भारी संख्या में लोग यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं।












