Location: Garhwa

विजय ठाकुर द्वारा जारी किया गया दुर्लभ तस्वीर
गढ़वा। झारखंड आंदोलन के नायक, झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक, पूर्व मुख्यमंत्री, केंद्रीय कोयला मंत्री और तत्कालीन राज्यसभा सांसद दिशोम गुरु शिबू सोरेन के आकस्मिक निधन पर झारखंड आंदोलनकारी विजय ठाकुर ने गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने गुरुजी को शत-शत नमन करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है।
विजय ठाकुर ने कहा कि झारखंड और देश ने एक महान आदिवासी नेता को खो दिया है। गुरुजी उनके राजनीतिक गुरु ही नहीं, बल्कि पिता तुल्य अभिभावक और पथ प्रदर्शक भी थे। उन्होंने बताया कि गुरुजी के नेतृत्व में उन्होंने मात्र 23 वर्ष की उम्र से ही झारखंड आंदोलन में तन, मन और धन अर्पित करते हुए वर्ष 1990 से गढ़वा जिला में झामुमो का जनाधार मजबूत करने और आंदोलन को धार देने का काम किया। गुरुजी का हर आदेश उनके लिए सर्वोपरि था और हर आंदोलन और कार्यक्रम को सफल बनाने का प्रयास किया।
उन्होंने बताया कि जब जिला प्रशासन द्वारा कार्यकर्ताओं के साथ प्रताड़ना होती थी, तो गुरुजी स्वयं डीआईजी और एसपी को झामुमो के साथ सौतेला व्यवहार नहीं करने का निर्देश देते थे और आंदोलनकारियों का मनोबल बढ़ाते रहते थे।
विजय ठाकुर ने गुरुजी द्वारा दिए गए एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि जब अधिकारियों द्वारा आम जनता के कार्यों में लापरवाही की शिकायत की जाती थी, तो गुरुजी कहा करते थे कि “प्रखंड और अंचल कार्यालयों के इर्द-गिर्द रहा करो, और अगर कोई गरीब जनता काम न होने के कारण निराश लौट रहा हो, तो उसे लेकर अधिकारी के पास जाओ और पूछो कि काम क्यों नहीं हो रहा।” इस मूलमंत्र को आधार बनाकर उन्होंने जनसेवा के साथ झामुमो का प्रचार भी किया।
उन्होंने कहा कि गुरुजी के निधन से पूरे राज्य विशेषकर झारखंड आंदोलनकारियों को गहरा आघात पहुंचा है। अब हम अपनी व्यथा किससे कहेंगे, अब हम सब अनाथ हो गए हैं। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि गुरुजी को अपने श्रीचरणों में स्थान दें।











