Location: Garhwa
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गढ़वा, 31 जुलाई।
सुबह की सैर पर निकले एक स्थानीय नागरिक को दो सरकारी कर्मियों की बातचीत ने ठिठका दिया। दोनों कर्मी चर्चा कर रहे थे कि “डीसी साहब ने तो नकेल कस दी है, निरीक्षण कर सबको हिला कर रख दिए हैं…”। यह बात यूं तो सामान्य लग सकती है, लेकिन इसके पीछे का संदेश प्रशासन की सक्रियता और सख्ती को दर्शाता है।
बात दरअसल 16 जुलाई को डंडई प्रखंड में उपायुक्त दिनेश कुमार यादव द्वारा किए गए औचक निरीक्षण की है। इस निरीक्षण के दौरान 13 कर्मी बिना सूचना के कार्यालय से अनुपस्थित पाए गए थे। परिणामस्वरूप कुछ कर्मियों को निलंबित किया गया, कुछ को स्थानांतरित किया गया और कई का मानदेय रोका गया।
यह पहली बार नहीं है जब उपायुक्त ने लापरवाह कर्मियों पर इस प्रकार की सख्त कार्रवाई की हो। कुछ ही सप्ताह पहले धुरकी प्रखंड में मनरेगा योजना में गड़बड़ी की शिकायतों के आधार पर जांच हुई थी, जिसमें दोषी पाए गए कर्मियों पर निलंबन और बर्खास्तगी जैसी कड़ी कार्रवाइयां की गई थीं।
इन दो बड़े मामलों के बाद अब यह साफ हो गया है कि उपायुक्त सिर्फ मुख्यालय में बैठकर नहीं, बल्कि सुदूर प्रखंडों तक जाकर सरकारी व्यवस्था को जवाबदेह बनाने में जुटे हैं।
डंडई निरीक्षण की चर्चा अब सरकारी दफ्तरों की फाइलों से निकलकर आमजन की बातचीत तक पहुंच चुकी है — जिससे यह संदेश गया है कि अब लापरवाही की कोई जगह नहीं है।











