Location: Garhwa
गढ़वा। झारखंड आंदोलनकारी विजय ठाकुर ने कहा है कि दिशोम गुरु शिबू सोरेन जिस सम्मान के अधिकारी थे, उन्हें राष्ट्रपति द्वारा देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मभूषण से अलंकृत किया जाना स्वागतयोग्य कदम है। उन्होंने कहा कि यह सम्मान झारखंड आंदोलन के संघर्ष और योगदान की राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृति का प्रतीक है।
विजय ठाकुर ने कहा कि राज्य गठन के लिए संघर्ष करने वाले हजारों झारखंड आंदोलनकारी आज भी अपने जीवन के अंतिम पड़ाव पर गरीबी, बीमारी और उपेक्षा का जीवन जीने को मजबूर हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि राज्य सरकार आखिर कब तक आंदोलनकारियों को मान-सम्मान, पेंशन और उनके आश्रितों को रोजगार के लाभ से वंचित रखेगी।
उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार की टालमटोल नीति के कारण राज्य गठन के 26 वर्ष बाद भी आंदोलनकारियों की मांगें पूरी नहीं हो सकी हैं। उन्होंने कहा कि इस दौरान कई बार झारखंड मुक्ति मोर्चा की सरकार बनी और तीन-तीन झारखंड आंदोलनकारी मुख्यमंत्री भी राज्य का नेतृत्व कर चुके हैं, लेकिन अलग राज्य आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले अनेक आंदोलनकारी अब भी सरकारी सुविधाओं और सम्मान से वंचित हैं।
विजय ठाकुर ने कहा कि अपनी मांगों को लेकर आंदोलनकारियों को मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने तक के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इसके बावजूद राज्य सरकार और उसके सहयोगी दल इस मुद्दे पर गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि गढ़वा जिले में करीब दो दर्जन झारखंड आंदोलनकारियों का निधन हो चुका है, लेकिन आज तक किसी भी सरकार की ओर से उनके परिवारों को कोई विशेष सहयोग या सहायता नहीं दी गई। उन्होंने राज्य सरकार से झारखंड आंदोलनकारियों को सम्मानजनक पेंशन, मान्यता और उनके आश्रितों को रोजगार उपलब्ध कराने की मांग की है।











