Location: सगमा
सगमा (गढ़वा)।
मां की ममता को शर्मसार कर देने वाली एक घटना ने पूरे सगमा प्रखंड को झकझोर दिया। मकरी गांव के यूके लिप्टाश जंगल के पास झाड़ियों में एक नवजात बालक रोता हुआ मिला।
सुबह करीब आठ बजे गांव निवासी चंदन बैठा रोज़ की तरह शौच के लिए जंगल की ओर जा रहे थे। तभी झाड़ियों से मासूम के रोने की आवाज सुनाई दी। पहले तो उन्होंने डरते-डरते कदम बढ़ाए, लेकिन जैसे ही पत्तों के बीच झांका, उनकी आंखें फटी की फटी रह गईं—एक नवजात बच्चा, नन्ही-सी जान, ठंडी हवा में लिपटा हुआ रो रहा था।
चंदन बैठा ने तुरंत गांव के बीरबल पंचायत के मुखिया इंद्रजीत कुशवाहा को फोन कर सूचना दी। मुखिया ने उन्हें बच्चे को घर लाने को कहा। कुछ ही देर में मुखिया के दरवाजे पर मासूम को देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी।
मुखिया ने घटना की जानकारी धुरकी थाना पुलिस को दी। सूचना मिलते ही एएसआई सुनील कुमार दल-बल के साथ पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। पुलिस ने लिखित रूप से बच्चे की देखभाल की जिम्मेदारी मुखिया इंद्रजीत कुशवाहा को सौंप दी। फिलहाल बच्चा उनके घर पर सुरक्षित है।
बच्चे को गोद लेने के लिए कई लोग आगे आ चुके हैं। डॉक्टरों के अनुसार नवजात बालक का वजन लगभग 2 किलो 100 ग्राम है और वह पूरी तरह स्वस्थ है।
गांव के लोग अब भी यह सोचकर विचलित हैं कि एक मां ने किस मजबूरी या बेरहमी में अपनी कोख से जन्मे बच्चे को यूं जंगल में छोड़ दिया। लेकिन अब इस मासूम की आंखों में डर की जगह सुरक्षा और स्नेह है, क्योंकि पूरे गांव ने इसे अपनी संतान की तरह अपनाने का संकल्प ले लिया है।











