Location: Meral
मेराल प्रखंड अंतर्गत चामा स्थित कृषक पाठशाला परिसर में भारत स्वाभिमान ट्रस्ट का 32वां स्थापना दिवस जिला स्तरीय सामूहिक कार्यक्रम के रूप में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत योग विस्तारक सुशील केसरी द्वारा वैदिक हवन-यज्ञ से कराई गई, जिसमें दर्जनों कार्यकर्ताओं ने आहुति दी।
कार्यक्रम का शुभारंभ पतंजलि के वरिष्ठ योग शिक्षक अरुण कुमार मिश्रा, भारत स्वाभिमान ट्रस्ट के जिला प्रभारी संतोष कुमार चौबे, पतंजलि के जिला प्रभारी शैलेश कुमार शुक्ला, प्रदीप केसरी सहित अन्य अतिथियों द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बीएसटी जिला प्रभारी संतोष कुमार चौबे ने कहा कि 31 वर्ष पूर्व स्वामी रामदेव जी महाराज के नेतृत्व में योग, आयुर्वेद, स्वदेशी, सनातन धर्म, विकसित भारत और भारतीय संस्कृति के पुनर्जागरण के उद्देश्य से पतंजलि योग समिति एवं भारत स्वाभिमान ट्रस्ट की स्थापना की गई थी। उन्होंने सभी से प्रतिदिन योग करने और कार्यकर्ताओं से योग कक्षाएं लगाकर पतंजलि के मिशन को घर-घर तक पहुंचाने का आह्वान किया।
वरिष्ठ योग शिक्षक अरुण कुमार मिश्रा ने पतंजलि योग समिति के मिशन में सक्रिय योगदान देने का संकल्प दोहराते हुए कहा कि स्वस्थ जीवन के लिए योग और आयुर्वेद को अपनाना आवश्यक है।
कार्यक्रम का संचालन कर रहे पतंजलि योग समिति के जिला प्रभारी शैलेश कुमार शुक्ला ने योग एवं आयुर्वेद के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने भारतीय शिक्षा बोर्ड और वैदिक शिक्षा पर चर्चा करते हुए कहा कि आने वाले समय में देश के सभी जिलों में गुरुकुलम एवं आचार्य कुलम की स्थापना की जाएगी, जहां बच्चों को वैदिक शिक्षा प्रदान की जाएगी।
भारतीय शिक्षा बोर्ड के जिला प्रभारी ब्रजेश कुमार मिश्रा ने कहा कि योग ऋषि स्वामी रामदेव जी महाराज के निर्देशन में सीबीएसई के पैटर्न पर आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ वैदिक शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भारतीय शिक्षा बोर्ड का गठन किया गया है।
कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी रही। इस अवसर पर विजय सोनी, प्रदीप केसरी, मीना केसरी, रंजीत चौबे, विकास कुमार, सत्येंद्र सिंह, आनंद मोहन तिवारी, आशुतोष, ओमकार जी, गुप्तेश्वर प्रसाद, सत्येंद्र प्रसाद, पीयूष तिवारी, रणजीत सिंह, सुरजीत सिंह, सुरेंद्र प्रसाद केसरी, संगीता गुप्ता सहित अनेक लोग उपस्थित थे।











