Location: Garhwa
गढ़वा। भाजपा विधायक सत्येंद्रनाथ तिवारी द्वारा विधानसभा में पूछे गए अल्पसूचित प्रश्न संख्या 24 और 20 के जवाब में अंजनी सिंह से जुड़े क्रशर एवं पत्थर खनन मामलों में कई गंभीर तथ्य सामने आए हैं। विधायक ने सरकार के जवाब के आधार पर गढ़वा के रंका प्रखंड अंतर्गत गासेदाग तथा पलामू जिले के छतरपुर और डनटूटा क्षेत्र में संचालित क्रशर एवं खनन गतिविधियों को लेकर संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाया है।
गासेदाग में अंजनी सिंह द्वारा स्थापित क्रशर को लेकर सरकार ने जांच के बाद सदन में बताया कि तत्कालीन उपायुक्त एवं जिला खनन पदाधिकारी द्वारा जारी एनओसी नियमसंगत थी। हालांकि विधायक सत्येंद्रनाथ तिवारी ने इस जवाब को स्वीकार नहीं करते हुए तत्कालीन डीसी और डीएमओ की भूमिका की जांच कराने तथा दोषी पाए जाने पर संबंधित पदाधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग दोहराई है।
विधायक के प्रश्न के दूसरे खंड के जवाब में सरकार ने माना कि क्रशर से प्रदूषण संबंधी समस्या है। क्रशर के 100 मीटर के दायरे में विद्यालय होने के कारण वहां पढ़ने वाले बच्चे, शिक्षक तथा राहगीर प्रभावित हो रहे हैं। इसके अलावा क्रशर से निकलने वाली धूल के कारण आसपास की कृषि योग्य भूमि के प्रभावित होने की शिकायत भी सामने आई है।
सरकार के अनुसार 7 अगस्त 2026 को हुई जांच में अनियमितता पाई गई। इसके बावजूद तत्काल क्रशर बंद कराने अथवा कठोर कार्रवाई करने के बजाय संचालक को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। विधायक का आरोप है कि खान निदेशालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति तथा संबंधित कानूनों के उल्लंघन के बावजूद कार्रवाई के बजाय केवल नोटिस देकर मामले को टालने का प्रयास किया जा रहा है।
विधायक ने कहा कि जांच के तीसरे बिंदु में सरकार ने यह भी स्वीकार किया है कि क्रशर से निकलने वाली डस्ट के कारण रैयतों की कृषि योग्य भूमि प्रभावित हुई है। जांच दल ने खेती योग्य भूमि को बचाने के लिए समुचित व्यवस्था बहाल करने का निर्देश दिया है।
विधायक सत्येंद्रनाथ तिवारी ने कहा कि जब जांच में लगातार अनियमितताएं सामने आ रही हैं तो नियम विरुद्ध चल रहे क्रशर को तत्काल सील क्यों नहीं किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि संबंधित पदाधिकारियों ने अविलंब कार्रवाई नहीं की तो जन आंदोलन किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
डनटूटा खदान में 3.46 करोड़ रुपये से अधिक की वसूली का मामला
अल्पसूचित प्रश्न संख्या 20 के जवाब में पलामू जिले के डनटूटा पत्थर खदान से संबंधित एक और गंभीर मामला सामने आया है। सरकार ने अपने जवाब में बताया कि अंजनी सिंह के नाम से संबंधित खदान की लीज अवधि 24 फरवरी 2024 को समाप्त हो गई थी। इसके बावजूद अवैध खनन किए जाने का मामला सामने आया।
विधानसभा में प्रश्न उठने के बाद सरकार ने अंजनी सिंह के विरुद्ध ब्याज सहित 3,46,09,477 रुपये की बकाया राशि की वसूली के लिए नीलाम पत्र वाद संख्या 175/2026-27 दायर किए जाने की जानकारी दी है।
विधायक ने सवाल उठाया कि यदि लीज अवधि समाप्त होने के बाद अवैध खनन हुआ और सरकार को करोड़ों रुपये की राशि वसूलनी है, तो संबंधित संचालक के विरुद्ध अब तक कठोर कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
छतरपुर के क्रशर पर भी वर्षों से कार्रवाई नहीं होने का आरोप
प्रश्न संख्या 20 के दूसरे खंड में सरकार ने पलामू जिले के छतरपुर में नियम विरुद्ध स्थापित क्रशर के संबंध में भी जानकारी दी। विधायक का आरोप है कि संबंधित अधिकारियों द्वारा वर्षों तक कार्रवाई नहीं की गई और विधानसभा में मामला उठने के बाद ही विभागीय स्तर पर कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हुई।
उन्होंने बताया कि खान निदेशालय द्वारा पत्रांक 2056, दिनांक 8 अगस्त 2026 के माध्यम से झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के सदस्य सचिव से आवश्यक कार्रवाई के लिए अनुरोध किया गया है।
विधायक ने कहा कि जब लंबे समय से नियम विरुद्ध क्रशर संचालन की जानकारी थी तो इतने वर्षों तक कार्रवाई क्यों नहीं की गई। उन्होंने संबंधित पदाधिकारियों की भूमिका की जांच कर दोषी पाए जाने पर उन्हें दंडित करने तथा क्रशर संचालक के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की।
डीसी और डीएमओ से तत्काल कार्रवाई की मांग
सत्येंद्रनाथ तिवारी ने गढ़वा और पलामू के उपायुक्त तथा जिला खनन पदाधिकारियों से मांग की है कि जिन क्रशरों के संचालन में अनियमितता पाई गई है, उनके विरुद्ध तत्काल विधिसम्मत कार्रवाई की जाए। साथ ही बकाया जुर्माना एवं अन्य सरकारी राशि की शीघ्र वसूली सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने कहा कि अधिकारियों और क्रशर संचालकों की भूमिका की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। यदि प्रशासन ने अविलंब कार्रवाई नहीं की तो वे मामले को न्यायालय के समक्ष ले जाने के लिए बाध्य होंगे।











