Location: गढ़वा जिला
गढ़वा। पिछले दो दिनों से जिले में लगातार हो रही बारिश से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। कई इलाकों में जलजमाव की स्थिति उत्पन्न हो गई है, जबकि कोयल और पंडी समेत कई नदियों के जलस्तर में तेजी से वृद्धि होने से बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। निचले इलाकों में पानी फैलने से लोगों की परेशानी बढ़ गई है। कई जगह खेतों में पानी भर जाने से धान की खड़ी फसल डूब गई है। सड़कों पर कीचड़ और जलजमाव के कारण आवागमन भी प्रभावित हुआ है।
मझिआंव में लगातार बारिश के कारण कोयल नदी उफान पर है। नदी का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंच गया है। नदी का पानी दोनों किनारों पर फैल गया है और नगर पंचायत क्षेत्र में राधाकृष्ण मंदिर के समीप तक पानी पहुंच गया। बाढ़ की सूचना पर मझिआंव थाना प्रभारी अमित कुमार दल-बल के साथ नदी किनारे पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने लोगों से नदी के आसपास नहीं जाने की अपील की है।
थाना प्रभारी ने कहा कि बाढ़ के दौरान कई लोग नदी में बहकर आ रही लकड़ियों को पकड़ने के लिए गहरे पानी में चले जाते हैं, जिससे हादसे का खतरा रहता है। उन्होंने मझिआंव-ऊंटारी रोड स्थित कोयल नदी के पुल के आसपास भी सावधानी बरतने तथा अनावश्यक रूप से नदी के नजदीक नहीं जाने की चेतावनी दी। उन्होंने लोगों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल थाना को सूचना देने की अपील की। पुलिस द्वारा नदी क्षेत्र में लगातार निगरानी की जा रही है।
उधर, मझिआंव और बरडीहा प्रखंड क्षेत्र में पिछले तीन दिनों से जारी बारिश ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। जगह-जगह जलजमाव के कारण लोगों को परेशानी हो रही है। मझिआंव प्रखंड कार्यालय परिसर स्थित आंगनबाड़ी केंद्र में बारिश का पानी घुस गया है। इससे केंद्र में रखी सामग्री भीग गई और बच्चों के बैठने में भी परेशानी हो रही है। सेविका शीला देवी ने बताया कि केंद्र में पानी घुसने के कारण संचालन प्रभावित हुआ है और पानी निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं है।
मझिआंव नगर पंचायत क्षेत्र में भी जलजमाव की समस्या गंभीर हो गई है। बाजार समिति में दुकानों के सामने पानी जमा होने से दुकानदार परेशान हैं। कई निचले इलाकों में घरों में भी पानी घुसने की स्थिति बनी हुई है। लोगों का कहना है कि कई जगह नालियों की सफाई के बाद निकली पट्टियां टूट जाने के बावजूद उन्हें लंबे समय से नहीं लगाया गया है। इससे जल निकासी बाधित होने के साथ दुर्घटना की आशंका भी बनी हुई है। लोगों ने सभी नालियों पर पट्टियां लगाने और जल निकासी की समुचित व्यवस्था करने की मांग की है।
कांडी प्रखंड में भी देर रात हुई मूसलाधार बारिश के बाद पंडी नदी उफान पर आ गई। वहीं सोन नदी का जलस्तर बढ़ने से नारायणपुर के समीप पंडी और सोन नदी के संगम स्थल पर पानी का दबाव काफी बढ़ गया। सोन में बढ़े जलदबाव के कारण पंडी नदी का पानी सामान्य गति से आगे नहीं निकल पा रहा है। इसके बाद पानी पलटधारा के रूप में नदी किनारे के खेतों और आसपास के गांवों में फैलने लगा है।
नारायणपुर सहित आसपास के इलाके जलमग्न हो गए हैं। कई जगह नदी और खेत के बीच का अंतर तक समाप्त हो गया है। बड़ी संख्या में धान की खड़ी फसल पानी में डूब गई है। चोका, बेलहथ, नारायणपुर, बरवादीह, बलियारी, पतीला, अमडीहा, भीलमा, शिवरी और पखनाहा समेत आसपास के गांवों के प्रभावित होने की सूचना है।
किसानों के लिए यह स्थिति चिंता का कारण बन गई है। धान की फसल तैयार होने की अवस्था में है और लंबे समय तक खेतों में पानी जमा रहने से फसल खराब होने की आशंका है। किसानों का कहना है कि बीज, खाद, दवा, जुताई और मजदूरी पर पहले ही बड़ी राशि खर्च हो चुकी है। कई किसानों ने खेती के लिए कर्ज भी लिया है। ऐसे में फसल डूबने से उन्हें दोहरी आर्थिक मार झेलनी पड़ सकती है।
ग्रामीणों और किसानों ने प्रशासन से प्रभावित क्षेत्रों का तत्काल स्थलीय निरीक्षण कराने तथा फसल क्षति का सर्वे कराने की मांग की है। उनका कहना है कि राजस्व और कृषि विभाग की टीम गांवों में पहुंचकर नुकसान का वास्तविक आकलन करे, ताकि प्रभावित किसानों को नियमानुसार सरकारी सहायता और मुआवजा मिल सके।
लगातार बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर के बीच जिले के कई हिस्सों में लोगों की चिंता बढ़ गई है। फिलहाल सबसे बड़ी चिंता निचले इलाकों में जलजमाव, नदी के जलस्तर में और वृद्धि तथा खेतों में जमा पानी को लेकर है। यदि बारिश का सिलसिला जारी रहा और पानी लंबे समय तक खेतों में जमा रहा तो फसल नुकसान का दायरा और बढ़ सकता है।










