Location: Garhwa
गढ़वा:
बाल सुरक्षा और संरक्षण के क्षेत्र में वर्ष 2025 गढ़वा जिले के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धियों भरा वर्ष साबित हुआ है। जिला प्रशासन, कानून प्रवर्तन एजेंसियों और सामुदायिक नेतृत्व के साथ समन्वय स्थापित कर कार्य करते हुए लोहरदगा ग्राम स्वराज्य संस्थान ने जिले में कुल 1184 बच्चों को बाल विवाह एवं ट्रैफिकिंग से बचाने में सफलता हासिल की है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, वर्ष 2025 में जिले में 1097 बाल विवाह रुकवाए गए, जबकि 87 बच्चों को ट्रैफिकिंग (बाल दुर्व्यापार) गिरोहों के चंगुल से मुक्त कराया गया। ट्रैफिकिंग से मुक्त कराए गए बच्चों में 67 लड़कियां और 20 लड़के शामिल हैं।
लोहरदगा ग्राम स्वराज्य संस्थान, बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए कार्यरत देश के सबसे बड़े नागरिक समाज नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (JRC) का सहयोगी संगठन है। जेआरसी नेटवर्क के 250 से अधिक सहयोगी संगठन देश के 451 जिलों में बाल अधिकारों की रक्षा, बाल विवाह और बच्चों के खिलाफ अपराधों की रोकथाम के लिए सक्रिय हैं।
जेआरसी नेटवर्क द्वारा 1 जनवरी 2025 से अब तक देशभर में 1,98,628 बाल विवाह रोके गए हैं, जबकि इसी अवधि में 55,146 बच्चों को ट्रैफिकिंग से मुक्त कराया गया, जिनमें 40,830 लड़के और 14,316 लड़कियां शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, बच्चों की ट्रैफिकिंग से जुड़े 42,217 मामलों में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।
इन प्रयासों के प्रभाव पर प्रकाश डालते हुए लोहरदगा ग्राम स्वराज्य संस्थान के सचिव श्री सी.पी. यादव ने कहा कि वर्ष 2025 बाल सुरक्षा की दिशा में एक ऐतिहासिक वर्ष रहा है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन, पुलिस, ग्राम पंचायतों और शिक्षकों के सहयोग से जमीन पर किए गए प्रयासों का सकारात्मक परिणाम सामने आया है। उन्होंने यह भी कहा कि ट्रैफिकिंग से मुक्त कराना पहला कदम है, लेकिन बच्चों का पुनर्वास, स्कूलों में पुनः नामांकन और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को सरकारी कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ना बेहद जरूरी है।
लोहरदगा ग्राम स्वराज्य संस्थान जेआरसी नेटवर्क के साथ मिलकर 2030 तक भारत से बाल विवाह, बाल मजदूरी और बाल वेश्यावृत्ति के उद्देश्य से होने वाली ट्रैफिकिंग के खात्मे के लक्ष्य को लेकर कार्य कर रहा है। यह नेटवर्क रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) सहित सभी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ समन्वय में कार्य करता है, जिससे समय रहते हस्तक्षेप कर बच्चों को सुरक्षित किया जा सके।
बाल विवाह की सामाजिक कुप्रथा पर रोक के लिए सभी धर्मों के तीन लाख से अधिक धार्मिक नेताओं को इस अभियान से जोड़ा गया है, जो समाज को यह संदेश दे रहे हैं कि बाल विवाह गैरकानूनी है और किसी भी धर्म द्वारा इसकी अनुमति नहीं दी जाती। जिले के कई धार्मिक स्थलों पर यह सूचना बोर्ड लगाए गए हैं कि वहां बाल विवाह की स्वीकृति नहीं है।
इसके साथ ही केंद्र सरकार के ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान के तहत चलाए जा रहे 100 दिवसीय गहन जागरूकता कार्यक्रम में जिला प्रशासन के सहयोग से लोहरदगा ग्राम स्वराज्य संस्थान द्वारा विवाह समारोहों से जुड़े टेंट व्यवसायियों, बैंड संचालकों, दर्जियों, सजावट कर्मियों और कैटरर्स के साथ बैठकें कर उन्हें जागरूक किया जा रहा है कि बाल विवाह में किसी भी प्रकार का सहयोग कानूनन अपराध है।












