Location: Manjhiaon
मझिआंव। प्रतिनिधि। गढ़वा जिले के बरडीहा थाना क्षेत्र में इलाज के दौरान 16 वर्षीय किशोर की मौत का मामला सामने आया है। मृतक की पहचान विशुनपुरा गांव निवासी गणेश पाल के पुत्र अनोज कुमार पाल के रूप में हुई है। परिजनों ने बरडीहा बाजार स्थित प्रज्ञा ड्रग स्टोर के संचालक नरेश प्रसाद और उनके पुत्र शशि प्रसाद पर गलत तरीके से इलाज करने तथा नस में इंजेक्शन लगाने का आरोप लगाया है। घटना के बाद परिजनों में आक्रोश है।
बुखार आने पर इलाज के लिए पहुंचा था किशोर
परिजनों के अनुसार अनोज सोमवार को बरडीहा थाना क्षेत्र के जीका गांव स्थित अपने नाना देवनाथ पाल के घर आया था। इसी दौरान उसे बुखार हो गया। इसके बाद उसका मामा दिनेश पाल उसे इलाज के लिए बरडीहा बाजार स्थित प्रज्ञा ड्रग स्टोर ले गया।
मृतक के मामा दिनेश पाल का आरोप है कि वहां मौजूद शशि प्रसाद ने अनोज को नस में इंजेक्शन लगाया। इंजेक्शन लगते ही उसकी हालत बिगड़ गई और वह बेहोश हो गया। मामा के अनुसार उन्होंने नस में इंजेक्शन लगाने से मना करते हुए कमर में इंजेक्शन लगाने की बात कही थी, लेकिन उनकी बात नहीं मानी गई।
हालत बिगड़ने के बाद शशि प्रसाद और दिनेश पाल किशोर को मोटरसाइकिल से बरडीहा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे। वहां चिकित्सकों ने उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए मझिआंव रेफरल अस्पताल रेफर कर दिया। मझिआंव रेफरल अस्पताल में चिकित्सक नवल किशोर चौधरी ने जांच के बाद किशोर को मृत घोषित कर दिया।
पुलिस ने शव का कराया पोस्टमार्टम
घटना की सूचना मझिआंव थाना पुलिस को दी गई। सूचना मिलने पर एसआई तपेश कुमार और एएसआई पीपी एक्का रेफरल अस्पताल पहुंचे और शव का पंचनामा तैयार कर पोस्टमार्टम के लिए गढ़वा भेज दिया। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। किशोर की मौत के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था।
पूर्व में भी मौत की घटना का थाना प्रभारी ने दिया हवाला
बरडीहा थाना प्रभारी ऋषिकेश कुमार सिंह ने बताया कि पुलिस को जानकारी मिली है कि वर्ष 2022 में भी बरडीहा निवासी सुनेश विश्वकर्मा की पुत्री आरती कुमारी की उक्त व्यक्ति के यहां इलाज के दौरान मौत हुई थी। उस मामले में भी गलत इलाज का आरोप लगाया गया था।
थाना प्रभारी ने बताया कि वर्तमान मामले में पोस्टमार्टम कराया गया है। परिजनों की ओर से आवेदन मिलने के बाद प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच और आगे की कार्रवाई की जाएगी।
दवा दुकान के लाइसेंस की भी जांच की मांग
मृतक के परिजनों ने संबंधित दवा दुकान के लाइसेंस नंबर 20ए-101997 और 21ए-101998 का हवाला देते हुए आरोप लगाया है कि दवा बेचने के साथ कथित रूप से चिकित्सा कार्य भी किया जा रहा था। परिजनों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि किशोर की मौत किन परिस्थितियों में हुई और इलाज करने वाले व्यक्ति के पास चिकित्सा कार्य करने की वैधानिक योग्यता थी या नहीं।
घटना के बाद स्थानीय लोगों के अनुसार दवा दुकान बंद मिली और संचालक के मौके पर नहीं होने की बात सामने आई।
सीएमओ ने कहा—दवा बेचने का लाइसेंस, इलाज का नहीं
इस संबंध में जिला मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी जॉन ऑफ कैनेडी ने कहा कि दवा दुकानदार को दवा बेचने के लिए लाइसेंस दिया जाता है, इलाज करने के लिए नहीं। यदि दवा दुकानदार द्वारा चिकित्सा कार्य किया गया है तो मृतक के परिजनों के आवेदन के बाद मामले की जांच कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल किशोर की मौत का वास्तविक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।











