गढ़वा जिले के तीनों निकायों में उपाध्यक्ष पद पर नजर, समीकरण और संसाधन दोनों बन रहे निर्णायक

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गढ़वा जिला में नगर निकाय चुनाव संपन्न होने के बाद अब उपाध्यक्ष पद को लेकर तीनों शहरी निकायों में हलचल तेज हो गई है। गढ़वा नगर परिषद, श्री बंशीधर नगर नगर पंचायत और मझिआंव नगर पंचायत—तीनों जगहों पर वार्ड पार्षदों की भूमिका केंद्र में आ गई है।
चेयरमैन के चुनाव के बाद अब असली राजनीतिक गणित उपाध्यक्ष पद के लिए बिछाई जा रही है। खुला प्रचार भले कम दिखाई दे रहा हो, लेकिन अंदरखाने संपर्क, बैठकें और समर्थन जुटाने की कोशिशें लगातार जारी हैं।
गढ़वा नगर परिषद: बहुकोणीय मुकाबला
गढ़वा नगर परिषद में उपाध्यक्ष पद के लिए कई नाम सामने आए हैं। पारस कश्यप, अनीता प्रसाद, रश्मि सिन्हा, विनोद प्रसाद, राजा सिंह और मनोज मेहता को संभावित दावेदारों के रूप में देखा जा रहा है।
यहां मुकाबला बहुकोणीय है और स्पष्ट बहुमत किसी एक खेमे के पास दिखाई नहीं दे रहा। ऐसे में हर पार्षद का समर्थन निर्णायक बन गया है। 17 मार्च को होने वाले चुनाव से पहले समर्थन जुटाने की प्रक्रिया तेज है।
श्री बंशीधर नगर: सीमित दावेदार, सधे हुए कदम
श्री बंशीधर नगर में उपाध्यक्ष पद की दौड़ मुख्य रूप से ओमप्रकाश चौबे और नीरज कुमार के बीच मानी जा रही है। दोनों पक्ष पार्षदों के साथ संवाद बनाए हुए हैं।
यहां समीकरण अपेक्षाकृत स्पष्ट माने जा रहे हैं, फिर भी अंतिम समय तक स्थिति बदलने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। चुनाव 18 मार्च को प्रस्तावित है।
मझिआंव नगर पंचायत: वार्ड आधारित संतुलन
मझिआंव नगर पंचायत में रविकांत कुमार (वार्ड 10), गीता सिंह (वार्ड 4) और प्रदीप साव (वार्ड 1) के नाम चर्चा में हैं। यहां , स्थानीय और व्यक्तिगत समीकरण प्रभाव डाल सकते हैं।
19 मार्च को यहां उपाध्यक्ष पद का चुनाव होना है और पार्षदों की प्राथमिकताएं ही परिणाम तय करेंगी।
समर्थन का गणित और संसाधनों की भूमिका
तीनों निकायों में एक बात समान रूप से उभरकर सामने आ रही है—उपाध्यक्ष पद का चुनाव प्रत्यक्ष रूप से जनता द्वारा नहीं, बल्कि चुने गए पार्षदों द्वारा होगा। ऐसे में समर्थन का गणित सबसे अहम है।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि केवल राजनीतिक निष्ठा ही नहीं, बल्कि व्यक्तिगत प्रभाव, संगठनात्मक क्षमता और संसाधनों की उपलब्धता भी परिणाम को प्रभावित कर सकती है। हालांकि किसी भी प्रकार के लेन-देन की आधिकारिक पुष्टि नहीं है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा अवश्य है कि इस बार समीकरण साधने में “सक्रिय प्रयास” निर्णायक साबित हो सकते हैं।
17, 18 और 19 मार्च को क्रमशः तीनों निकायों में होने वाले चुनावों के साथ तस्वीर साफ हो जाएगी। फिलहाल गढ़वा जिले की राजनीति का केंद्र उपाध्यक्ष की कुर्सी है, और सभी की नजर अंतिम परिणाम पर टिकी हुई है।

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  • Vivekanand Upadhyay

    Location: Garhwa Vivekanand Updhyay is the Chief editor in AapKiKhabar news channel operating from Garhwa.

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