विराट दीपयज्ञ के साथ हुआ नौदिवसीय श्रीराम कथा का समापन

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नारी जागरण से ही बदलेगी समाज एवं राष्ट्र की परिस्थिति : शोभा पाठक

गढ़वा : शारदीय नवरात्रि के अवसर पर गायत्री शक्तिपीठ कल्याणपुर में चल रहे श्रीराम कथा का समापन दीपयज्ञ के साथ संपन्न हुआ. वहीं नवमी तिथि को कन्या पूजन एवं हवन यज्ञ के साथ अनुष्ठान की पूर्णाहूति की गयी. हवन यज्ञ में काफी संख्या में महिला-पुरुषों ने भाग लिया. अंतिम दिन दीपयज्ञ का उदघाटन गढ़वा थाना प्रभारी सह पुलिस इंस्पेक्टर सुनील तिवारी ने अखंड दीप जलाकर किया. इस अवसर पर श्रीराम कथा में संगीत गायन करनेवाले शिवपूजन मेहता व्यास, सह व्यास उपेंद्र शर्मा, बैंजो वादक रंजीत विश्वकर्मा, नाल वादक राम सुंदर राम, झालवादक नंदू विश्वकर्मा एवं अशोक विश्वकर्मा को को सम्मानित किया गया. थाना प्रभारी श्री तिवारी ने सभी कलाकारों को तिलक कर एवं अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया. इस अवसर पर ओम समिति के सदस्यों ने थाना प्रभारी सुनील तिवारी, अवर निरीक्षक प्रदीप कुमार केसरी एवं एएसआई अभिमन्यु सिंह को भी अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया. थाना प्रभारी श्री तिवारी ने गायत्री शक्तिपीठ कल्याणपुर में आयोजित श्रीराम कथा के आयोजन की प्रशंसा की. कथा के अंतिम दिन समाजसेवी ताहिर अंसारी, पूर्व मुखिया विनोद चंद्रवंशी एवं भाजपा नेता कृष्णा चंद्रवंशी ने भी भाग लिया. सभी को समिति की ओर से सम्मानित किया गया. दीपयज्ञ शोभा पाठक एवं सुनंदा दूबे ने संयुक्त रूप से किया. इस अवसर पर शोभा पाठक ने कहा कि रामचरित मानस में सीता, मांडवी एवं उर्मिला का चरित्र आज के महिलाओं के लिये अनुकरणीय है. उन्होंने नारी जागरण पर प्रकाश डालते हुये कहा कि वर्तमान परिस्थिति में बदलाव महिलाओं की सक्रिय भूमिका से ही संभव है. परिवार निर्माण, समाज निर्माण एवं राष्ट्र निर्माण सभी क्षेत्रों में महिलाओं को नेतृत्व करने की जरूरत है. प्राचीन काल में अंबाला, घोषा, गार्गी, मैत्री जैसी महिलाएं जहां वेद की ऋचाएं लिखीं, वहीं माता अनसूइया, सावित्री, शांडिलीनी, शकुंतला आदि ने नारी शक्ति का लोहा मनवाया था. आधुनिक भारत में झांसी की रानी, हाड़ा रानी, पद्मावती, अहिल्याबाई होल्कर जैसी महिलाएं हमारे लिये आदर्श हैं. गायत्री परिवार के विनोद पाठक ने श्रीराम कथा का समापन किया. उन्होंने हरि अनंत हरि कथा अनंता, कहहिं सुनहिं बहु विधि सब संता… चौपाई के माध्यम से कहा कि श्रीराम कथा का अंत करना मुश्किल है. इस कथा को सभी संत, विद्वान अपने-अपने हिसाब से वर्णन करते आये हैं. रामचरित मानस के पात्रों का आदर्श प्रस्तुत कर परिवार एवं समाज में हो रहे पतन को रोका जा सकता है. श्रीराम कथा को संपन्न करने में, गायत्री परिवार के सरयू चंद्रवंशी, अखिलेश कुशवाहा, मिथिलेश कुशवाहा, अनिल विश्वकर्मा, प्रभु दयाल प्रजापति, अरूण प्रजापति, प्रो संत कुमार, ओम समिति के अध्यक्ष चंद्रमणि कुमार, उपाध्यक्ष अजीत शर्मा, सचिव संदीप विश्वकर्मा, कोषाध्यक्ष उत्तम विश्वकर्मा, ब्रजेश विश्वकर्मा, गौतम विश्वकर्मा, राम मिलन विश्वकर्मा, पप्पू चंद्रवंशी, रिंकू चंद्रवंशी आदि ने सक्रिय भूमिका निभायी. नवमी की तिथि की शाम में भंडारा का आयोजन किया गया.

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  • Pavan Kumar

    Location: Garhwa Pavan Kumar is reporter at आपकी खबर News from Garhwa

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