Location: Garhwa
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) की बिरसा संदेश रथ यात्रा मंगलवार शाम गढ़वा पहुँची, जहाँ परिषद के कार्यकर्ताओं ने रथ का उत्साहपूर्वक स्वागत किया।
इसके बाद उत्सव गार्डन, गढ़वा में आयोजित सभा में विभिन्न वक्ताओं ने जनजातीय इतिहास, संस्कृति और बिरसा मुंडा के योगदान पर विस्तृत चर्चा की।
परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री यज्ञवल्लभ शुक्ला ने कहा कि झारखंड और देश में स्वतंत्रता आंदोलन की शुरुआत सबसे पहले जनजातीय नायकों ने की थी। उन्होंने बताया कि आदिवासी समाज ने अंग्रेजों और विदेशी शक्तियों के विरुद्ध सबसे प्रारंभिक विद्रोहों का नेतृत्व किया।
उन्होंने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा ने मात्र 25 वर्ष की आयु में समाज को अपनी मिट्टी, संस्कृति और परंपरा से जुड़े रहने का संदेश दिया था। शुक्ला ने यह भी कहा कि वर्तमान समय में जनजातीय क्षेत्रों में धर्मांतरण और सांस्कृतिक विघटन जैसी समस्याएँ बढ़ रही हैं, जिनसे निपटने के लिए समाज को सजग होना आवश्यक है।
परिषद नेता प्रतीक सिंह ने कहा कि बिरसा मुंडा ने स्वतंत्रता, स्वाभिमान और सामाजिक चेतना की राह दिखायी। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज आज अपनी सांस्कृतिक पहचान के संकट से गुजर रहा है और इस स्थिति को समझने तथा सुधारने के लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता है।
सिंह ने यह भी कहा कि झारखंड के कई स्वतंत्रता सेनानियों को इतिहास में उचित पहचान नहीं मिल सकी है, जिसे पुनः स्थापित किए जाने की जरूरत है।
वरिष्ठ नेता विनय चौबे ने अपने संबोधन में कहा कि उलगुलान और जनजातीय संस्कृति देश की गौरवपूर्ण धरोहर है और इसे संरक्षित रखना आज के समय की मांग है।
धनंजय कुमार सिंह ने कहा कि ABVP कार्यकर्ता बिरसा मुंडा के विचारों—शराबबंदी, स्वच्छता, सामाजिक सद्भाव और परिवार-प्रबोधन—को घर-घर पहुँचाने के लिए अभियान चला रहे हैं। उन्होंने कहा कि बिरसा मुंडा का जीवन जनजातीय समाज ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
कार्यक्रम में , प्रोफेसर उमेश कुमार साहय, प्रोफेसर सत्यदेव पांडे और रितेश चौबे सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
सभा में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं और कार्यकर्ताओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिससे कार्यक्रम का वातावरण ऊर्जावान बना रहा











