खबर पलामू से

  • Rohit Kumar - Reporter @ Aapki Khabar, JharkhandRohit Kumar
  • पलामू
  • Regional News
  • June 25, 2026
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Location: पलामू

प्रमंडलीय आयुक्त ने SIR-2026 की तैयारियों की समीक्षा की, मतदाता सूची की शुद्धता पर दिया जोर
मेदिनीनगर। पलामू प्रमंडलीय आयुक्त श्रीमती कुमुद सहाय की अध्यक्षता में एसआईआर-2026 (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) के सफल एवं सुव्यवस्थित संचालन को लेकर समीक्षात्मक बैठक आयोजित की गई। बैठक में पलामू, गढ़वा एवं लातेहार के उप निर्वाचन पदाधिकारी तथा आयुक्त के सचिव रोहित सिन्हा उपस्थित थे।
बैठक में आयुक्त ने एसआईआर-2026 से संबंधित सभी तैयारियां निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरी करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही या शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन सुनिश्चित करें।
आयुक्त ने बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) के प्रशिक्षण पर विशेष जोर देते हुए कहा कि उन्हें निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप प्रशिक्षित किया जाए ताकि वे अपने दायित्वों का प्रभावी निर्वहन कर सकें। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची की शुद्धता एवं पारदर्शिता सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। वास्तविक मतदाताओं की सही पहचान सुनिश्चित की जाए तथा कोई भी पात्र व्यक्ति मतदाता सूची से वंचित न रहे।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि मतदाता सत्यापन की प्रक्रिया पूरी सावधानी और निष्पक्षता के साथ संपन्न की जाए तथा सभी तथ्यों का भौतिक सत्यापन सुनिश्चित किया जाए। बैठक में इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ईआरओ) की भूमिका एवं दायित्वों की भी विस्तार से समीक्षा की गई। आयुक्त ने कहा कि ईआरओ अपने क्षेत्राधिकार में मतदाता सूची पुनरीक्षण, दावों एवं आपत्तियों के निष्पादन तथा मतदाता पंजीकरण से जुड़े कार्यों को समयबद्ध एवं पारदर्शी तरीके से पूरा करें।
उन्होंने एसआईआर-2026 के तहत चलाए जा रहे अभियान के व्यापक प्रचार-प्रसार का भी निर्देश दिया ताकि अधिक से अधिक लोग मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया की जानकारी प्राप्त कर सकें और आवश्यकतानुसार अपना नाम जोड़ने, संशोधित कराने अथवा दावे-आपत्तियां दर्ज करा सकें।
आयुक्त ने कहा कि एसआईआर-2026 का सफल आयोजन प्रशासन की प्राथमिकता है। इसके लिए सभी अधिकारी नियमित रूप से प्रगति प्रतिवेदन उपलब्ध कराएं तथा आवश्यकता पड़ने पर स्थल निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा भी लिया जाएगा। बैठक में अधिकारियों के सुझावों एवं प्रतिवेदनों पर चर्चा करते हुए कार्यक्रम को सुरक्षित, सफल एवं व्यवस्थित बनाने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।


उपायुक्त की अध्यक्षता में यूनिसेफ एवं सहयोगी संस्थाओं के साथ समन्वय बैठक, बाल संरक्षण पर बनी रणनीति
मेदिनीनगर। उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी दिलीप प्रताप सिंह शेखावत की अध्यक्षता में समाहरणालय स्थित कार्यालय कक्ष में यूनिसेफ इंडिया कंट्री ऑफिस, यूनिसेफ झारखंड तथा सहयोगी संस्था पीसीआई के प्रतिनिधियों के साथ समन्वय बैठक आयोजित की गई। बैठक में बाल संरक्षण, बाल विवाह की रोकथाम, बाल श्रम उन्मूलन तथा किशोर-किशोरियों के समग्र विकास से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में यूनिसेफ इंडिया कंट्री ऑफिस, नई दिल्ली के चाइल्ड प्रोटेक्शन स्पेशलिस्ट जैरस लिगू, यूनिसेफ झारखंड की चाइल्ड प्रोटेक्शन स्पेशलिस्ट प्रीति श्रीवास्तव, पीसीआई की स्टेट प्रोग्राम मैनेजर अंकिता सहित कई अधिकारी एवं विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
बैठक के दौरान बाल अधिकारों के संरक्षण एवं बच्चों के समग्र विकास के लिए संचालित कार्यक्रमों की समीक्षा की गई। विभिन्न विभागों एवं संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा बाल संरक्षण से जुड़े मुद्दों के प्रभावी समाधान के लिए रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया गया। इस दौरान बाल विवाह रोकथाम, बाल श्रमिकों की पहचान एवं पुनर्वास, सामुदायिक जागरूकता को मजबूत बनाने तथा किशोर-किशोरियों के सशक्तिकरण और विकास को बढ़ावा देने पर विशेष चर्चा हुई।
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-6) के आंकड़ों की समीक्षा करते हुए बताया गया कि जिले एवं राज्य में बाल विवाह की घटनाओं में कमी दर्ज की गई है, जो सकारात्मक संकेत है। हालांकि 15 से 19 वर्ष आयु वर्ग की किशोरियों में गर्भधारण की दर में वृद्धि चिंता का विषय बनी हुई है। इस पर सभी प्रतिभागियों ने किशोर स्वास्थ्य, जागरूकता, शिक्षा, जीवन कौशल विकास तथा आवश्यक सेवाओं तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी हस्तक्षेप की आवश्यकता पर बल दिया।
बैठक में यह निर्णय लिया गया कि बाल संरक्षण कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सरकारी विभागों, यूनिसेफ, पीसीआई एवं नागरिक समाज संगठनों के बीच समन्वय को और मजबूत किया जाएगा। साथ ही सामुदायिक सहभागिता बढ़ाने, जन-जागरूकता अभियान चलाने, रेफरल प्रणाली को सुदृढ़ करने तथा बाल कल्याण संबंधी गतिविधियों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने पर सहमति बनी।
उपायुक्त ने कहा कि बच्चों और किशोर-किशोरियों के लिए सुरक्षित, संरक्षित एवं विकासोन्मुख वातावरण का निर्माण जिला प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने सभी विभागों एवं सहयोगी संस्थाओं से समन्वित प्रयासों के साथ कार्य कर बाल संरक्षण एवं किशोर विकास कार्यक्रमों को और प्रभावी बनाने का आह्वान किया।
मुहर्रम को लेकर प्रशासन अलर्ट, डीजे पर प्रतिबंध, ड्रोन और सीआरपीएफ की निगरानी में निकलेगा जुलूस
मेदिनीनगर। मुहर्रम पर्व को शांतिपूर्ण एवं सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न कराने के लिए पलामू जिला प्रशासन और पुलिस पूरी तरह अलर्ट मोड में है। पर्व के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के उद्देश्य से पुलिस द्वारा मॉक ड्रिल आयोजित कर शक्ति प्रदर्शन किया गया। इसमें बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों ने भाग लिया।
पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि मुहर्रम के दौरान शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई है। असामाजिक तत्वों पर विशेष नजर रखी जा रही है तथा सोशल मीडिया गतिविधियों की लगातार निगरानी की जा रही है। जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों में लगातार शांति समिति की बैठकें आयोजित की जा रही हैं।
मुहर्रम जुलूस के दौरान पर्याप्त संख्या में पुलिस बल की तैनाती की जाएगी। पलामू प्रमंडल के विभिन्न इलाकों में निकलने वाले जुलूसों को देखते हुए जिलों में हाई अलर्ट जारी किया गया है तथा संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर विशेष निगरानी की व्यवस्था की गई है। प्रशासन ने कंट्रोल रूम भी स्थापित किए हैं ताकि किसी भी स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।
पलामू एसपी कपिल चौधरी ने बताया कि मुहर्रम को लेकर सभी एसडीपीओ और थाना प्रभारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। उन्हें अपने-अपने क्षेत्रों में लगातार पेट्रोलिंग और निगरानी करने का निर्देश दिया गया है।
वर्ष 2025 में पाटन क्षेत्र में मुहर्रम जुलूस के दौरान हुई हिंसक झड़प को देखते हुए इस बार अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में सीआरपीएफ की एक कंपनी तैनात करने की योजना बनाई है। इसके अलावा ड्रोन, सीसीटीवी कैमरों और अतिरिक्त पुलिस बल की मदद से निगरानी की जाएगी।
एसपी ने बताया कि जिले में 200 से अधिक अतिरिक्त पुलिस बल तथा होमगार्ड जवानों की भी तैनाती की जा रही है। कई क्षेत्रों में फ्लैग मार्च निकाला जा रहा है ताकि लोगों में सुरक्षा का भरोसा कायम रहे।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मुहर्रम के अवसर पर डीजे बजाने की अनुमति नहीं होगी। एसडीएम ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुरूप किसी भी पर्व-त्योहार में डीजे पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। जुलूसों की निगरानी के लिए विभिन्न स्थानों पर मिनी कंट्रोल रूम स्थापित किए जाएंगे तथा मजिस्ट्रेटों की तैनाती भी की जाएगी।
प्रशासन ने चेतावनी दी है कि नशे की हालत में जुलूस में शामिल होने वाले अथवा माहौल बिगाड़ने की कोशिश करने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने लोगों से शांति, भाईचारा और सौहार्द बनाए रखने की अपील की है।

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