Location: Garhwa
गढ़वा: पंडित हर्ष द्विवेदी कला मंच, नवादा (गढ़वा) द्वारा संचालित नवोदित रचनाकारों को समर्पित मासिक साहित्यिक आयोजन “काव्यानुरागी” में आज राष्ट्रकवि डॉ. हरिवंश राय बच्चन जी की पुण्यतिथि के अवसर पर उपस्थित रचनाकारों ने अपनी काव्य रचनाओं के माध्यम से उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम का विषय प्रवेश कराते हुए साहित्यकार प्रमोद कुमार ने कहा कि डॉ. हरिवंश राय बच्चन ने मधुशाला के माध्यम से जीवन के सुख–दुःख, हार–जीत और आत्मस्वीकृति को सशक्त प्रतीकों में पिरोकर प्रस्तुत किया। उनकी भाषा सहज, प्रवाहपूर्ण और भावनाओं से ओत-प्रोत थी, जिसमें विद्वत्ता के साथ-साथ लोकहृदय की सरलता भी समाहित थी। वे केवल कवि नहीं, बल्कि अपने समय के साक्षी और मानवीय संवेदनाओं के सशक्त संवाहक थे।
उन्होंने कहा कि बच्चन जी अपने काव्य के माध्यम से जीवन में आगे बढ़ने का मूल मंत्र देते हैं—“जो बीत गई सो बात गई”—और विपरीत परिस्थितियों में भी साहस, उत्सवधर्मिता और मानवीयता बनाए रखने की प्रेरणा देते हैं। जिनकी वाणी ने पीढ़ियों को शब्द, अर्थ और जीवन को देखने की नई दृष्टि दी, ऐसे महान कवि को उनकी पुण्यतिथि पर कोटि-कोटि नमन।
इसके पश्चात कवि धर्मेन्द्र कुमार पुष्कर ने “इस रंगमंच के तुम बस एक मुसाफिर हो…” रचना प्रस्तुत की।
मंच के निदेशक नीरज श्रीधर ‘स्वर्गीय’ ने “तुम्हीं मेरी संगिनी हो, तुम्हीं प्राण वायु…” कविता का पाठ किया।
कवयित्री जयपूर्णा विश्वकर्मा ने “मौन” शीर्षक कविता के माध्यम से मानवीय संवेदनाओं को प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त किया।
वहीं कवि सौरभ कुमार तिवारी ने डॉ. बच्चन को भावांजलि अर्पित करते हुए “कोशिश करने वालों की हार नहीं होती…” कविता का सस्वर पाठ किया।अंत में शांति पाठ के साथ आयोजन सम्पन्न हुआ।












