Location: Garhwa
यह मंडलियां का बिजका पंचायत का वही इलाका है जहां 56 साल पहले बिजली के खंभे तो लगे, लेकिन रोशनी कभी नहीं आई। यहां के लोगों के लिए यह दौरा एक प्रशासनिक औपचारिकता नहीं बल्कि एक उम्मीद की तरह देखा गया।
बिजली नहीं, तो विकास कैसा?
जनसंवाद के दौरान ग्रामीणों ने सीधी बात रखी — “हम आज भी अंधेरे में हैं।” इस पर उपायुक्त ने कहा कि 15 अगस्त 2026 तक भंडरिया प्रखंड के सभी अविद्युतीकृत गांवों में बिजली पहुंचा दी जाएगी।
झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड की योजना के मुताबिक बिजका और अन्य गांवों में 29 किलोमीटर 11 केवी लाइन, 22 किलोमीटर एलटी केबल, 16 ट्रांसफार्मर और 735 घरों को मुफ्त कनेक्शन देने की योजना है। निविदा प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।
भरोसे का निर्माण या वादों की पुनरावृत्ति?
ग्रामीणों ने बताया कि कुछ साल पहले भी खंभे और तार लगाए गए थे लेकिन बिजली नहीं आई। इस बार क्या फर्क होगा? इस पर उपायुक्त ने अधिकारियों को मौके पर ही निर्देश दिया कि कार्य में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए।
पेयजल और राशन: योजनाएं हैं, लेकिन निष्पादन धीमा
- जल जीवन मिशन के तहत लगे जलमीनार खराब हैं। कुछ दिनों ही पानी आता है, फिर बंद हो जाता है।
- राशन दुकान की स्थिति भी बेहतर नहीं पाई गई। नेटवर्क की समस्या और इलेक्ट्रॉनिक तराजू की अनुपलब्धता से ग्रामीणों को कठिनाई हो रही है।
उपायुक्त ने मौके पर मौजूद अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि योजनाओं की निगरानी की जाए और लोगों को किसी भी स्थिति में वंचित न रखा जाए।
निरीक्षण के साथ संवाद की कोशिश
इस दौरे की खास बात थी कि उपायुक्त ने केवल मीटिंग नहीं की, बल्कि घर-घर जाकर लोगों से सीधे बातचीत भी की। ग्रामीणों ने बताया कि यह पहली बार है जब किसी वरीय अधिकारी ने उनके दरवाजे पर आकर हालचाल पूछा।
उपायुक्त का यह दौरा प्रतीकात्मक भी था और कार्यात्मक भी। वर्षों से उपेक्षित गांव में पहुंचकर उन्होंने लोगों को भरोसा देने की कोशिश की है। हालांकि, यह भरोसा तब ही स्थायी होगा जब 2026 तक बिजली के साथ-साथ बाकी योजनाओं का लाभ भी वास्तविक रूप से लोगों तक पहुंचे।












