Location: Garhwa
गढ़वा। दिव्यांग बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने और विद्यालयों में उनका नामांकन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उपायुक्त पशुपति नाथ मिश्रा की अध्यक्षता में विशेष नामांकन अभियान के सफल संचालन को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिला शिक्षा अधीक्षक अनुराग मिंज, सिविल सर्जन जेएफ कैनेडी, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी पंकज कुमार गिरी, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी अर्चना सिन्हा सहित शिक्षा विभाग के अन्य पदाधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।
बैठक में उपायुक्त ने कहा कि जिले के प्रत्येक दिव्यांग बच्चे तक शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि किसी भी बच्चे को उसकी दिव्यांगता के आधार पर विद्यालय में प्रवेश देने से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने बताया कि दिव्यांग बच्चों के नामांकन हेतु 15 जून से 24 जून 2026 तक विशेष नामांकन अभियान चलाया जा रहा है, जिसके तहत जिला, प्रखंड और विद्यालय स्तर पर विभिन्न गतिविधियां संचालित की जाएंगी।
उपायुक्त ने समाज में दिव्यांगता को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर करने तथा अभिभावकों को जागरूक करने पर जोर देते हुए कहा कि दिव्यांग बच्चे भी शिक्षा प्राप्त कर आत्मनिर्भर बन सकते हैं। उन्होंने निर्देश दिया कि अभियान का व्यापक प्रचार-प्रसार समाचार पत्रों, होर्डिंग, पोस्टर, पंपलेट तथा सोशल मीडिया के माध्यम से किया जाए। प्रचार सामग्री में यह संदेश प्रमुखता से अंकित करने को कहा गया कि 3 से 18 वर्ष आयु वर्ग के किसी भी दिव्यांग बच्चे का निकटतम विद्यालय में नामांकन अवश्य कराया जाए।
बैठक में यह भी बताया गया कि विद्यालयों में नामांकित दिव्यांग बच्चों को समग्र शिक्षा अभियान के तहत व्हीलचेयर, बैसाखी, श्रवण यंत्र, ब्रेल किट, स्काउट भत्ता तथा परिवहन भत्ता जैसी विभिन्न निःशुल्क सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। उपायुक्त ने कहा कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009, दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम-2016 तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि कोई भी दिव्यांग बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे।
जिला शिक्षा अधीक्षक अनुराग मिंज ने बताया कि यू-डायस प्लस 2025-26 के आंकड़ों के अनुसार जिले के 3 से 18 वर्ष आयुवर्ग के कुल 3,17,942 नामांकित बच्चों में मात्र 1,609 दिव्यांग बच्चे ही विद्यालयों में नामांकित हैं, जो अपेक्षाकृत कम संख्या है। इससे स्पष्ट है कि जिले में बड़ी संख्या में दिव्यांग बच्चे अब भी विद्यालय से बाहर हैं।
उन्होंने बताया कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए DAHAR 2.0 पोर्टल के माध्यम से 6 से 18 वर्ष आयु वर्ग के कुल 81 दिव्यांग एवं विद्यालय से बाहर बच्चों की पहचान की गई है, जिनमें 9 बच्चे होम बेस्ड एजुकेशन श्रेणी के हैं। उपायुक्त ने निर्देश दिया कि सभी विद्यालय अपने पोषक क्षेत्रों में किए गए सर्वेक्षण का सत्यापन कर लें और यदि कोई दिव्यांग बच्चा सर्वेक्षण में छूट गया हो तो उसका नाम तत्काल दर्ज कराया जाए।
बैठक के अंत में यह संकल्प लिया गया कि जिले का कोई भी दिव्यांग बच्चा शिक्षा से वंचित नहीं रहेगा। अधिकारियों ने इसे केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं बल्कि दिव्यांग बच्चों को उनके शिक्षा के अधिकार और सम्मानजनक जीवन का अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में एक मानवीय पहल बताया।