Location: Garhwa
गंगा-जमुनी तहज़ीब की झलक, परंपरा और श्रद्धा के संग प्रस्तुत हुई ताजियादारी और हरण तङ्गीज की कलाएं
गढ़वा में वर्ष 2025 का मोहर्रम जुलूस पूरे अकीदत, अनुशासन और शांतिपूर्ण वातावरण के बीच निकाला गया। यह ऐतिहासिक जुलूस गढ़वा के मेन रोड से शुरू होकर नगर के मुख्य मार्गों से होते हुए कर्बला मैदान तक पहुँचा, जहाँ पालम (मातम और ताजियों की विदाई) के साथ इसका समापन हुआ।
जुलूस में गढ़वा शहर और आसपास के क्षेत्रों से विभिन्न अखाड़ों के लोग शामिल हुए, जिन्होंने पारंपरिक परिधानों, ताजियों और बैनरों के साथ भाग लिया। परंपरागत हथियारों और ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच एक से बढ़कर एक हरण तङ्गीज की कलाएं प्रस्तुत की गईं, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उमड़ पड़े।
इस अवसर पर हिन्दू-मुस्लिम समुदाय के लोगों ने मिलकर एकता और भाईचारे की अद्भुत मिसाल पेश की। नगर के प्रमुख चौक-चौराहों पर शरबत, ठंडा पानी और जलपान के लिए सेवा शिविर लगाए गए, जहाँ श्रद्धालुओं का स्वागत पूरे आदर और सम्मान के साथ किया गया।
कार्यक्रम के अंत में सभी मोहर्रम कमेटियों और भाग लेने वाले अखाड़ों को उनके सहयोग, अनुशासन और कला प्रदर्शन के लिए सम्मानित भी किया गया। यह आयोजन न सिर्फ धार्मिक आस्था का प्रतीक रहा, बल्कि गढ़वा की गंगा-जमुनी तहज़ीब की जीवंत मिसाल बनकर उभरा।












