Location: Garhwa
गढ़वा। झारखंड प्रदेश आंगनबाड़ी वर्कर्स यूनियन के बैनर तले शुक्रवार को समाहरणालय के समक्ष सात सूत्री मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन शुरू किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष कौशल्या देवी ने की। प्रदर्शन के बाद यूनियन की ओर से एक मांग पत्र मुख्यमंत्री के नाम उपायुक्त को सौंपा गया।
धरना प्रदर्शन को जिला परिषद अध्यक्ष शांति देवी और कन्या विवाह एंड विकास समिति के सचिव विकास माली ने समर्थन दिया। जिला परिषद अध्यक्ष शांति देवी ने कहा कि आंगनबाड़ी सेविकाओं की मांगें पूरी तरह से उचित हैं और राज्य सरकार को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सेविकाएं 62 वर्ष की उम्र तक सेवा देती हैं, लेकिन सेवा पूरी होने के बाद उन्हें केवल व्हाट्सएप मैसेज के जरिए हटाया जाता है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। सरकार को उन्हें उचित मान-सम्मान और पेंशन व्यवस्था देनी चाहिए।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष बालमुकुंद सिन्हा ने कहा कि आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका को श्रमिक का दर्जा देते हुए सरकारी कर्मचारी घोषित किया जाए। सेवा समाप्ति पर एकमुश्त पांच लाख रुपये की राशि और मानदेय का आधा पेंशन दिया जाए, जैसा कि पश्चिम बंगाल में लागू है। उन्होंने कहा कि 2022 के संकल्प पत्र में सेविकाओं के मानदेय में प्रतिवर्ष 500 रुपये और सहायिकाओं के मानदेय में 250 रुपये वृद्धि का उल्लेख है, लेकिन यह लागू नहीं हो रहा है। इसमें सुधार करते हुए सेविकाओं का मानदेय प्रतिवर्ष 1000 रुपये और सहायिकाओं का 500 रुपये बढ़ाया जाए तथा इसे अनुशंसा मुक्त किया जाए।
साथ ही सेविकाओं को प्रवेशिका पद पर नियुक्त करने और सहायिकाओं को प्रोन्नति देकर सेविका पद पर पदोन्नत करने की मांग की गई। पोषण ट्रैकर में फेस रिकॉग्निशन सिस्टम से हो रही तकनीकी दिक्कतों पर भी सवाल उठाए गए और इसे हटाने की मांग की गई।
कार्यक्रम में प्रदेश अध्यक्ष बीना सिन्हा, प्रदेश संयोजक रामचंद्र पासवान, संगठन सचिव ग्लोरिया टुडू, कोषाध्यक्ष पुष्पा देवी, निभा देवी, रीता देवी, बबीता देवी, श्यामा देवी, गीत देवी, प्रभा देवी समेत बड़ी संख्या में आंगनबाड़ी सेविका-सहायिकाएं उपस्थित थीं।












